झारखंड राज्य बने 25 साल पूरे हो गए है। 25 साल के सफर में स्वास्थ सेवाएं काफी ज़्यादा विकसित हुई है । लेकिन एक ऐसी व्यवस्था है जो आज भी बदहाल है .. राज्य सरकार की 108 एंबुलेंस सेवा। 108 एंबुलेंस सेवा को राज्य की लाइफाइन भी कहा जाता है। बड़े बड़े वादों और प्रयासों के बाद भी यह व्यवस्था नहीं सुधर पाई है । इसको निजी एजेंसियों द्वारा संचालित किया जाता है लेकिन हाल वही है । निजी एजेंसी के हाथ में 108 एंबुलेंस सेवा राज्य में 108 एंबुलेंस सेवा के लिए 542 चलाई जानी थी । 2024 में सम्मान फाउंडेशन को सरकार ने इसके संचालन की जिम्मेदारी दी थी । सम्मान फाउंडेशन अब तक 108 एंबुलेंस सेवा को नहीं दिल पाया है सम्मान। महीने 1.7 करोड़ रूपये इसके पीछे सरकार खर्च करती है। सम्मान फाउंडेशन पर कई गंभीर आरोप लगे और जांच के आदेश भी हुए लेकिन कंपनी चट्टान की तरह टिकी हुई है।

10 साल एंबुलेंस खरीद रहा विभाग
10 साल बाद आखिरकार सरकार ने इन गाड़ियों को बदलने के लिए 237 नई एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस की खरीदारी प्रक्रिया शुरू की है । 23 मार्च तक इसकी बिडिंग की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी । यह सभी एंबुलेंस अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे । लेकिन इतने में काम नहीं होने वाला है बल्कि सरकार को जल्द ही सभी 542 एंबुलेंस को बदलना होगा। सम्मान फाउंडेशन ने भी सरकार को पत्र के माध्यम से इसकी जानकारी दी है और आग्रह किया है कि इसे बदला जाए। अब ऐसी हालत में कब तक एंबुलेंस बदले जाएंगे यह कह पाना बेहद मुश्किल है।
एंबुलेंस कर्मी भी एजेंसी से परेशान
एंबुलेंस कर्मी कई बार कंपनी के खिलाफ आंदोलन कर चुके हैं । उन्होंने बताया कि सेवा संचालन संस्था सम्मान फाउंडेशन द्वारा श्रम कानूनों की अनदेखी की जाती है। कर्मचारियों के अनुसार PF-ESI में अनियमितता, वेतन भुगतान में देरी, मनमानी कटौती और ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं होने से कर्मचारी गंभीर आर्थिक संकट में रहते है। 100 किमी से अधिक IFT चलाने पर भी भोजन भत्ता और ओवरटाइम नहीं दिया जाता।
बदहाल व्यवस्था और बदहाल गाड़िया 108 एंबुलेंस सेवा में बदहाल एंबुलेंस व्यवस्था का मुख्य कारण एंबुलेंस गाड़ियां है । आखिरी बार 2015 में अभी चल रही गाड़ियों की खरीदारी हुई थी। इस गाड़ी को स्वास्थ मंत्री इरफान अंसारी खुद डब्बा बुलाते है। ज्यादातर गाड़ियां जर्जर हो चुकी है और हाफ रही है । 492 एम्बुलेंस रोड पर चल रहे है जबकि 542 गाड़ियों का निबंध किया गया था। 60 गाड़ियां इतनी खराब है कि वो बनने लायक भी नहीं है और सभी सिविल सर्जन के पास ही जमा है। ऐसे में हर गाड़ी पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
मोटर व्हीकल नियमों का हो रहा उल्लंघन
108 एंबुलेंस सेवा में चल रही 337 गाड़ियां ऐसी है जिसकी खरीदारी 2015 में हुई थी और सभी गाड़ियां करीब 10 लाख किलोमीटर चल चुकी है । MVI नियमों की माने तो 6 साल या 2.5 लाख किमी तक की ही गाड़ियां चलने की सीमा रहती है । सभी 542 गाड़ियों की सीमा समाप्त हो चुकी है लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं है।






