भोजशाला में 721 वर्षों में पहली बार हिंदू समुदाय की एंट्री, धार में अलर्ट मोड पर जिला प्रशासन
2003 की व्यवस्था के तहत शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष को नमाज और मंगलवार को हिंदू पक्ष को पूजा की अनुमति थी. लेकिन हाल ही में इंदौर हाईकोर्ट के आदेश के बाद नियमित पूजा-अर्चना जारी है. वहीं मुस्लिम पक्ष ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.

Dhar, Madhya Pradesh: धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर इंदौर हाईकोर्ट के हालिया आदेश के बाद आज का शुक्रवार बेहद संवेदनशील माना जा रहा है. करीब दो दशक पुरानी व्यवस्था के बाद यह पहला मौका है, जब शुक्रवार को भोजशाला परिसर में नमाज नहीं होगी. हाईकोर्ट के आदेश के बाद पूरे धार शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और पुलिस-प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है.
जिले में तैनात 2200 जवान
भोजशाला मामले को लेकर धार शहर में हाई अलर्ट जैसी स्थिति देखने को मिल रही है. प्रशासन के अनुसार जिले में करीब 2200 पुलिस जवान तैनात किए गए हैं. इनमें एसएएफ की कंपनियां, विशेष सुरक्षा बल, ड्रोन टीम, टीयर गैस स्क्वॉड और पेट्रोलिंग टीमें शामिल हैं. भोजशाला परिसर और आसपास के क्षेत्रों को सुरक्षा छावनी में तब्दील कर दिया गया है. करीब 700 जवान सिर्फ भोजशाला क्षेत्र में तैनात किए गए हैं. शहर के प्रमुख चौराहों, धार्मिक स्थलों और संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी रखी जा रही है.
जनता से शांति बनाए रखने की अपील
गुरुवार शाम पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त रूप से शहर में फ्लैग मार्च निकाला. फ्लैग मार्च भोजशाला क्षेत्र सहित कई संवेदनशील इलाकों से होकर गुजरा. इस दौरान कलेक्टर राजीव रंजन मीना और पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर विशेष निगरानी रखी जा रही है और किसी भी भ्रामक या भड़काऊ पोस्ट पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी. साइबर सेल और खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय मोड पर हैं. इस बीच सुरक्षा व्यवस्था के तहत डॉग स्क्वॉड और मेटल डिटेक्टर टीम द्वारा भोजशाला परिसर की सघन जांच भी की गई.
721 वर्षों में पहली बार हिंदू समुदाय की एंट्री
भोजशाला परिसर में दोपहर 1 बजे से अखंड पूजा और महाआरती का आयोजन किया गया जिसमें काफी संख्या में हिंदू समुदाय के लोगों ने हिस्सा लिया. बता दें, भोजशाला परिसर में पहली बार 721 वर्षों के बाद शुक्रवार के दिन हिंदु समुदाय के लोगों की एंट्री हुई है. इससे पहले प्रत्येक शुक्रवार को भोजशाला परिसर में दोपहर 1 बजे नमाज अदा की जाती थी लेकिन यह पहला शुक्रवार है जब कोर्ट के फैसले के बाद नमाज अदा नहीं की गई. कोर्ट के फैसले के बाद अब भोजशाला में लगाए गए उस बोर्ड को पोत कर हटा दिया गया है जिसपर पहले लिखा गया था ''शुक्रवार को हिंदुओं का प्रवेश वर्जित''.
इंदौर हाइकोर्ट के आदेश के बाद पूजा-अर्चना जारी
आपको बता दें, वर्ष 2003 की व्यवस्था के तहत शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष को नमाज और मंगलवार को हिंदू पक्ष को पूजा की अनुमति थी. लेकिन हाल ही में इंदौर हाईकोर्ट के आदेश के बाद नियमित पूजा-अर्चना जारी है. वहीं मुस्लिम पक्ष ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. जिसमें कोर्ट ने इस स्थान को देवी वाग्देवी सरस्वती का समर्पित मंदिर मानते हुए परिसर में शुक्रवार की नमाज पर रोक लगा दी गई थी.
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