महंगाई की मार, बच्चों की थाली से गायब हो रहा पोषाहार!, झारखंड की 36 हजार से ज्यादा आंगनबाड़ियों पर बड़ा संकट
झारखंड की 36,600 से अधिक आंगनबाड़ियों में बच्चों के पोषाहार पर संकट गहराया। पुराने सरकारी रेट, बढ़ती महंगाई और 8-9 महीने से फंड अटकने से राशन जुटाना मुश्किल।

Ranchi: झारखंड की करीब 36,600 आंगनबाड़ियों में 3 से 6 साल के मासूम बच्चों को मिलने वाले रोजाना के नाश्ते और खाने पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। आसमान छूती महंगाई और सरकारी रेट के भारी अंतर की वजह से केंद्रों का संचालन मुश्किल होता जा रहा है। बच्चों के पोषाहार के लिए बाजार से सामान खरीदना पड़ता है, लेकिन बाजार के मौजूदा दाम और सरकार द्वारा तय रेट में जमीन-आसमान का फर्क आ चुका है।
10 साल पुराने रेट पर चल रहा सिस्टम, चीनी का भाव दोगुना
हैरानी की बात यह है कि आंगनबाड़ियों के लिए जो सरकारी दरें करीब 10 साल पहले तय की गई थीं, आज 2026 की कमरतोड़ महंगाई में भी विभाग उसी पुरानी दर पर भुगतान कर रहा है। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुले बाजार में चीनी की कीमत 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है, जबकि सरकार आज भी इसके लिए महज 38 रुपये प्रति किलो के हिसाब से ही पैसे दे रही है। बाकी जरूरी राशन और खाद्य सामग्रियों की स्थिति भी कमोबेश ऐसी ही है।
8-9 महीने से फंड अटका, वर्कर्स यूनियन ने बयां किया दर्द
मुसीबत सिर्फ पुराने रेट तक सीमित नहीं है। पिछले 8 से 9 महीनों से आंगनबाड़ी केंद्रों को पोषाहार मद में मिलने वाला सरकारी फंड भी जारी नहीं किया गया है। बजट न मिलने और भारी महंगाई के कारण राशन जुटाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। झारखंड प्रदेश आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष बाल मुकुंद सिन्हा ने चिंता जताते हुए कहा कि बेतहाशा बढ़ी महंगाई की वजह से पोषाहार की खरीदारी करना बेहद मुश्किल हो गया है। अगर सरकार ने जल्द दरों में संशोधन कर बकाया फंड जारी नहीं किया, तो बच्चों की थाली से पौष्टिक आहार पूरी तरह गायब हो सकता है।
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