‘सपने देखिए और उन्हें पूरा करने का साहस दिखाइए’… कानपुर की दिव्या भंडोह सेवन समिट्स के लक्ष्य को पूरा कर रचेंगी इतिहास
कानपुर की बेटी दिव्या भंडोह की कामयाबी के सफर ने बता दिया है कि उम्र, हालात और मुश्किलें कभी भी हौसलों को रोक नहीं सकतीं. 46 वर्ष की उम्र में दिव्या भंडोह इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ी हैं.


‘सपने देखिए और उन्हें पूरा करने का साहस दिखाइए’… कानपुर की दिव्या भंडोह सेवन समिट्स के लक्ष्य को पूरा कर रचेंगी इतिहास
UP (KANPUR) : मंजिलें क्या है रास्ता क्या है, हौसला है तो फिर फासला क्या है. इसे सच साबित कर दिखाया है, कानपुर की बेटी दिव्या भंडोह ने. जिनकी कामयाबी के सफर ने बता दिया है कि उम्र, हालात और मुश्किलें कभी भी हौसलों को रोक नहीं सकतीं. 46 वर्ष की उम्र में दिव्या भंडोह इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ी हैं.
कोरोना महामारी के दौरान लिया संकल्प
अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही दिव्या सेवन समिट्स के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं. पांडु नगर निवासी दिव्या भंडोह पेशे से इंटीरियर डिजाइनर हैं. कोरोना महामारी के दौरान जब उनका बिजनेस ठप हुआ, तब मानसिक तनाव और अवसाद के दौर से गुजरते हुए उन्होंने खुद को मजबूत बनाने का संकल्प लिया. यहीं से उनका पर्वतारोहण का सफर शुरू हुआ.

2021 में दयारा बुग्याल ट्रेक से हुई यात्रा की शुरुआत
2021 में दयारा बुग्याल ट्रेक से उनकी यात्रा की शुरुआत हुई. इसके बाद उन्होंने लगातार ऊंचाइयों को छूते हुए 2022 में एवरेस्ट बेस कैंप, 2023 में अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारो, 2024 में यूरोप की सर्वोच्च चोटी माउंट एल्ब्रुस और 2025 में नेपाल की कठिन चोटी आइलैंड पीक को फतह किया. अब दिव्या का अगला लक्ष्य दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊँची चोटी माउंट अकोंकागुआ है, जहां करीब 70 किलोमीटर का कठिन ट्रेक कय करना होगा. दिव्या सभी तैयारियों के साथ कानपुर से इस ऐतिहासिक मिशन के लिए रवाना होने वाली हैं.

सांसद ने किया सम्मानित, खादी के तिरंगे को अगली चोटी पर फहराने का आग्रह
इस उपलब्धि की ओर बढ़ते उनके साहस को सलाम करते हुए कानपुर के सांसद रमेश अवस्थी ने उन्हें खादी का तिरंगा भेंट किया और सम्मानित किया. इस मौके पर उन्होंने कहा कि 46 वर्ष की उम्र में दिव्या महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी हैं. उन्होंने कानपुर ही नहीं, पूरे देश की महिलाओं का सिर गर्व से ऊँचा किया है. सांसद ने कहा मैंने उनसे आग्रह किया है कि इस खादी के तिरंगे को वे अपनी अगली चोटी पर जरूर फहराएं, ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के स्वदेशी और खादी अभियान को और बल मिले. उन्होंने कहा दिव्या जब मिशन पूरा कर लौटेंगी तो कानपुर लोकसभा उनका भव्य स्वागत करेगी.
‘खुद को सीमाओं में न बांधें, सपने देखिए और उन्हें पूरा करने का साहस दिखाइए’
वहीं सम्मान से अभिभूत दिव्या भंडोह ने आभार जताते हुए कहा कि यह खादी का तिरंगा मेरे लिए कानपुर वासियों का आशीर्वाद है. मैं इसे हर अभियान में विजय के प्रतीक के रूप में लहराऊंगी. मैं देश की हर महिला से कहना चाहती हूं कि खुद को सीमाओं में न बांधें, सपने देखिए और उन्हें पूरा करने का साहस दिखाइए.
कानपुर की यह बेटी आज देश की बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं.
रिपोर्ट : अभय त्रिपाठी

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