सोनम वांगचुक की बात मानकर देवेंद्र महतो ने छोड़ा 'निर्जला' व्रत
आज सुबह देवेंद्र नाथ महतो के पास लद्दाख के चर्चित पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का वीडियो कॉल आया। बातचीत के दौरान वांगचुक ने देवेंद्र की बिगड़ती तबीयत पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने एक बड़े भाई की तरह समझाया कि अपने हक की लड़ाई लड़ना बहुत जरूरी है

RANCHI: झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में हुई कथित धांधली को लेकर चल रहा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में बिना अन्न-जल ग्रहण किए निर्जला अनशन पर बैठे आंदोलनकारी नेता देवेंद्र नाथ महतो ने आज एक बड़ा फैसला लिया है। मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता Sonam Wangchuk से Video Call पर बातचीत के बाद देवेंद्र ने अपना निर्जला अनशन खत्म कर दिया है, हालांकि उन्होंने एकदम साफ कर दिया है कि सरकार के खिलाफ उनका यह आंदोलन अभी भी पूरी मजबूती के साथ जारी रहेगा।
सोनम वांगचुक ने दी जान बचाने की सलाह
आज सुबह देवेंद्र नाथ महतो के पास लद्दाख के चर्चित पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का वीडियो कॉल आया। बातचीत के दौरान वांगचुक ने देवेंद्र की बिगड़ती तबीयत पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने एक बड़े भाई की तरह समझाया कि अपने हक की लड़ाई लड़ना बहुत जरूरी है, लेकिन इसके लिए अपनी जान को जोखिम में डालना बिल्कुल भी समझदारी नहीं है। वांगचुक ने देवेंद्र से भावुक अपील की कि वे अपना आंदोलन जारी रखें, लेकिन पानी जरूर पीते रहें ताकि शरीर साथ देता रहे। वांगचुक की इसी नेक सलाह को मानते हुए देवेंद्र ने पानी पीकर अपना निर्जला उपवास तोड़ दिया।
देवेंद्र ने कहा- सिर्फ पानी पी रहा हूं, पीछे नहीं हटा
पानी पीने के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने स्पष्ट किया कि उन्होंने सिर्फ 'निर्जला' (बिना पानी का) अनशन तोड़ा है, उनका आमरण अनशन पहले की तरह ही जारी रहेगा। इस बीच, लगातार कई दिनों तक भूखे-प्यासे रहने की वजह से देवेंद्र की हालत को देखते हुए डॉक्टरों की एक विशेष टीम फौरन धरना स्थल पर पहुंच गई है। डॉक्टर लगातार उनके स्वास्थ्य की जांच कर रहे हैं और उनकी पल-पल की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। बता दें कि इस लड़ाई में देवेंद्र अकेले नहीं हैं, उनके साथ महेंद्र मंडल भी अनशन पर डटे हुए हैं।
ब्रह्मानंद अब भी पानी की एक बूंद को मोहताज
भले ही देवेंद्र महतो ने पानी पी लिया हो, लेकिन आंदोलन स्थल पर स्थिति अभी भी बेहद गंभीर और तनावपूर्ण बनी हुई है। एक अन्य आंदोलनकारी ब्रह्मानंद कुमार अभी भी खुले आसमान के नीचे कड़े निर्जला अनशन पर बैठे हैं। आज उनके भूखे-प्यासे धरने का चौथा दिन है और उन्होंने अब तक पानी की एक बूंद भी गले से नीचे नहीं उतारी है, जिससे उनकी तबीयत को लेकर भी गहरी चिंताएं पैदा हो गई हैं।
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