CNT एक्ट के बावजूद कैसे बसे 35 हजार बाहरी?, पूर्व सीएम चंपाई सोरेन बोले- कपाली से खत्म हो गया मूल गांवों का अस्तित्व
सरायकेला-खरसावां जिले के समाहरणालय में कोल्हान आयुक्त की अध्यक्षता में आयोजित एसआईआर (SIR) संबंधी अहम बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने कपाली क्षेत्र की बदलती डेमोग्राफी और जमीन लूट का मुद्दा पूरी ताकत से उठाया।


Jamshedpur: सरायकेला-खरसावां जिले के समाहरणालय में कोल्हान आयुक्त की अध्यक्षता में आयोजित एसआईआर (SIR) संबंधी अहम बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने कपाली क्षेत्र की बदलती डेमोग्राफी और जमीन लूट का मुद्दा पूरी ताकत से उठाया। बैठक में मौजूद प्रशासनिक अफसरों के सामने पूर्व सीएम ने आरोप लगाया कि 1995 की वोटर लिस्ट उठाकर देखें तो पूरे कपाली में मांझी, टुडू, महतो, मंडल और कुंभकार जैसे केवल आदिवासी और मूलवासी समाज के ही लोग दर्ज थे। उस समय वहां किसी अन्य समुदाय का एक भी नाम नहीं था, लेकिन पिछले कुछ सालों के भीतर सुनियोजित तरीके से आदिवासियों की जमीनें लूटकर कपाली को घुसपैठियों की कॉलोनी में तब्दील कर दिया गया।
पारंपरिक गांवों का अस्तित्व खत्म, CNT एक्ट के बावजूद 35 हजार बाहरी वोटर बसे
चंपाई सोरेन ने बैठक में कहा कि पुराने समय में कपाली पंचायत के तहत डांगरडीह, बांधगोड़ा, हांसाडूंगरी, केन्दडीह और कालियाडूंगरी जैसे कई पारंपरिक आदिवासी गांव हुआ करते थे। लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि इनमें से ज्यादातर गांवों का नामोनिशान और वजूद ही मिट चुका है। उन्होंने प्रशासन पर तीखा सवाल दागते हुए पूछा कि कड़े सीएनटी (CNT) एक्ट के प्रभावी रहने के बावजूद आखिर किसके संरक्षण में यहां 35 हजार से ज्यादा बाहरी वोटरों को बसा दिया गया। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन असली भूमिपुत्रों की यह पुश्तैनी जमीन थी, वे आज अपने ही इलाके में नाममात्र के रह गए हैं।
खतियानधारियों का नाम वोटर लिस्ट से हटाने की साजिश, 2 साल से चुप है प्रशासन
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि विस्थापित किए गए स्थानीय लोगों के पास जमीन का खतियान और सभी पुख्ता कागजात मौजूद हैं, फिर भी कानून की धज्जियां उड़ाकर उनकी जमीनें छीनी गईं और अब उनका नाम वोटर लिस्ट से बाहर करने का गंदा खेल चल रहा है। ग्रामीण पिछले दो साल से दफ्तरों के चक्कर काटकर शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। उन्होंने सवाल उठाया कि कपाली की मूल निवासी हुना मांझी को किसी अन्य बाहरी नाम से कैसे लिंक कर दिया गया। इस तरह न जाने कितने आदिवासियों का मताधिकार छीनकर संदिग्ध बांग्लादेशी घुसपैठियों को थमा दिया गया है।
सभी जिलों में बने डिटेंशन सेंटर, कमिश्नर और DC ने दिया जांच का भरोसा
राज्य के हालात पर गंभीर चिंता जताते हुए चंपाई सोरेन ने मांग रखी कि झारखंड के सभी जिलों में तत्काल प्रभाव से डिटेंशन सेंटर बनाए जाएं और संदिग्ध बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वहां भेजा जाए। पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा ठोस तथ्यों के साथ मामला उठाने के बाद कोल्हान कमिश्नर और जिले के उपायुक्त (DC) सहित तमाम वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच कराने का भरोसा दिया है।

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