देवघर रोप-वे दुर्घटना, सुप्रीम कोर्ट ने जारी की नोटिस.. झारखंड सरकार को रखना होगा अपना पक्ष
देवघर रोपवे हादसा (2022) से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को नोटिस जारी किया है. DRIL द्वारा दी गई चुनौती के बाद राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने को कहा गया है. इस हादसे में कई लोगों की मौत हो गई थी. वहीं जिम्मेवार कंपनी पर 5 साल तक के लिए बैन लगा दिया गया था.

Jharkhand (Deoghar): साल 2022 को हुए दिल दहला देने वाले देवघर के रोपवे हादसे में दो लोगों की जान चली गई थी. राज्य सरकार ने 19 अप्रैल 2022 को उच्च स्तरीय जांच का आदेश दिया था. जांच में दुर्घटना के लिए डीआरआईएल (DRIL) को जिम्मेदार ठहराया गया था. जिसने बाद में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट ने DRIL की याचिका पर झारखंड सरकार को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने कहा है कि झारखंड सरकार आकर अपना पक्ष रखे.
बता दें कि, देवघर में 2022 में रोपवे दुर्घटना हो गई थी. इस घटना के बाद प्रदेश की सरकार ने जुर्माना लगाते हुए कंपनी को पांच साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया था. इस आदेश के बाद डीआरआईएल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. यह याचिका न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ के समक्ष पेश की गई.
DRIL ने दायर की थी SC में याचिका
डीआरआईएल (DRIL) ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में राज्य सरकार की ब्लैक लिस्टिंग कार्रवाई और लगाए गए दंड पर आपत्ति जताई है. शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान पक्षकारों को नए तथ्य प्रस्तुत करने की अनुमति दी है. अब अदालत ब्लैक लिस्टिंग की अवधि और कार्रवाई की वैधता पर विचार करेगी. इससे पहले कंपनी हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई हार चुकी है.
हाईकोर्ट में पहले खारिज हो चुकी याचिकाएं
राज्य सरकार की कार्रवाई के खिलाफ डीआरआईएल ने पहले हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था. इसके बाद पुनर्विचार याचिका भी दायर की गई, लेकिन उसमें भी कोई नया तथ्य प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण उसे भी निरस्त कर दिया गया. इसके बाद कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
कैसे हुआ था हादसा
10 अप्रैल 2022 को देवघर के त्रिकूट पर्वत स्थित रोपवे में गंभीर दुर्घटना हुई थी. इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई थी और 59 लोग रोपवे में फंस गए थे. बचाव अभियान के लिए सेना की मदद ली गई थी. एक बड़ी पुल्ली, जो रोप को घूमाती है, उसके खांचे से रोप बाहर निकला हुआ था. पहाड़ी की तलहटी और चोटी के बीच अलग-अलग टावर के सहारे मूव करने वाला रोप एक जगह झूल रहा था. दुखद बात यह रही कि हादसे के दिन 10 अप्रैल को सारठ की बुजुर्ग सुमंती देवी की मौत हो गई जबकि 11 अप्रैल को एयरलिफ्ट के दौरान हादसे में दुमका निवासी राकेश मंडल और 12 अप्रैल को देवघर निवासी शोभा देवी की जान चली गई थी.
कैसे स्थापित हुआ था रोपवे सिस्टम
त्रिकूट पर्वत पर रोपवे सिस्टम की स्थापना साल 2009 में हुई थी. यह झारखंड का इकलौता और सबसे अनोखा रोपवे सिस्टम है. जमीन से पहाड़ी पर जाने के लिए 760 मीटर का सफर रोपवे के जरिए महज 5 से 10 मिनट में पूरा किया जाता है. कुल 24 ट्रॉलिया हैं. एक ट्रॉली में ज्यादा से ज्यादा 4 लोग बैठ सकते हैं. एक सीट के लिए 150 रुपए देने पड़ते हैं और एक केबिन बुक करने पर 500 रुपए लगता है. इसकी देखरेख दामोदर रोपवेज एंड इंफ्रा लिमिटेड, कोलकाता की कंपनी करती है. यही कंपनी फिलहाल वैष्णो देवी, हीराकुंड और चित्रकूट में रोपवे का संचालन कर रही है. कंपनी के जनरल मैनेजर कमर्शियल महेश मोहता ने बताया था कि कंपनी भी अपने स्तर से पूरे मामले की जांच कर रही है, लेकिन कंपनी ने भी अब तक कोई रिपोर्ट साझा नहीं की. हादसे के बाद कंपनी ने पीड़ित परिवारों को 25-25 लाख और राज्य सरकार ने 5-5 लाख की मुआवजा राशि दी थी.
9.11 करोड़ जुर्माना और ब्लैक लिस्टिंग
जांच रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार ने डीआरआईएल पर 9.11 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया और कंपनी को पांच वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया. दंड वसूली की जिम्मेदारी झारखंड पर्यटन विकास निगम (JTDC) को सौंपी गई, हालांकि अब तक राशि की वसूली नहीं हो पाई है.
क्या है रोपवे परियोजना
राइट्स ने वर्ष 2005 में डीआरआईएल को रोपवे निर्माण का कार्य दिया था. निर्माण पूरा होने के बाद 21 जुलाई 2008 को रोपवे पर्यटन विभाग को सौंपा गया. संचालन की जिम्मेदारी बाद में जेटीडीसी को दी गई थी.
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