छिंदवाड़ा: तामिया में 3 शावकों के साथ बाघिन की दस्तक, ग्रामीणों में दहशत
छिंदवाड़ा के एक गांव में बाघिन का अपने तीन शावकों का घुस आना चर्चा सहित दहशत का माहौल भी पैदा करता है. हालांकि वन विभाग द्वारा इलाके में अलर्ट जारी किया गया है. लेकिन यह स्थिति क्यों उत्पन्न....

MP (CHHINDWARA): मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के तामिया स्थित कुआबादला क्षेत्र में एक बाघिन अपने तीन शावकों के साथ देखी गई है. इस मूवमेंट के बाद वन विभाग ने आसपास के गांवों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है. बाघिन के डर से किसानों ने खेतों पर जाना छोड़ दिया है. प्रशासन ने ग्रामीणों को सतर्क रहने और अकेले जंगल की ओर न जाने की सख्त हिदायत दी है.
मध्यप्रदेश में जंगलों की कटाई
मध्यप्रदेश में जंगलों की कटाई एक गंभीर मुद्दा है, खासकर सिंगरौली जैसे जिलों में कोयला खनन और विकास परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जा रहे हैं. जिससे आदिवासी समुदायों के विस्थापन और पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, जिसका स्थानीय लोग और विपक्ष विरोध कर रहे हैं. वहीं सरकार विकास के नाम पर इसे सही ठहराने का दावा कर रही है.

छिंदवाड़ा के काफी नजदीक है पेंच टाइगर रिजर्व
मध्यप्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व का छिंदवाड़ा से सटे होने कारण भी एक संभावना होती है बाघों के गांवों में घुस आने की. पेंच टाइगर रिजर्व में जंगलों की कटाई एक चुनौती है, खासकर मानव-वन्यजीव संघर्ष, कृषि भूमि के विस्तार और कोयला खदानों (जैसे पेंच-सतपुड़ा गलियारे) के कारण. जिससे घने जंगलों का नुकसान हुआ है. हालांकि, वन रक्षक और संरक्षण के प्रयास, जैसे कि प्रोजेक्ट टाइगर, अवैध कटाई और शिकार को रोकने और वन आवरण में सुधार करने के लिए जारी हैं. जिससे बाघों की आबादी में वृद्धि हुई है, लेकिन यह चुनौती बनी हुई है.
बाघों के मानव बस्तियों में प्रवेश के कारण?
बाघिन (मादा बाघ) के गांव में प्रवेश के मुख्य कारण भोजन की तलाश (विशेषकर पालतू पशु), अपने शावकों के साथ सुरक्षित जगह की ज़रूरत, और जंगल के घटते या बाधित होते प्राकृतिक आवास हैं, जिससे वह भोजन और नए इलाके की खोज में मानव बस्तियों के करीब आ जाती है.









