'शरीर अस्पताल में, पर धड़कनें स्टेडियम में...', अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र महतो का बड़ा संदेश!
रांची में JPSC और JSSC की परीक्षाओं को लेकर छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।


JPSC-JSSC Protest: रांची में JPSC और JSSC की परीक्षाओं को लेकर छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। सड़कों पर उतरे युवाओं के इस बड़े आंदोलन के बीच, अनशन के कारण सदर अस्पताल में भर्ती छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने एक बेहद जरूरी संदेश दिया है। उन्होंने सरकार के साथ टेबल पर बातचीत करने गए छात्र प्रतिनिधियों से साफ कहा है कि हमारी यह लंबी लड़ाई सिर्फ एक या दो परीक्षाओं को रद्द कराने तक सिमट कर नहीं रहनी चाहिए, बल्कि हमें पूरे भर्ती सिस्टम की मुकम्मल सफाई चाहिए।
'सिर्फ परीक्षा रद्द होना हमारी अंतिम मंजिल नहीं'
अस्पताल के बेड से अपने साथी छात्रों को संबोधित करते हुए देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि अगर सरकार हमारे दबाव में आकर कुछ परीक्षाएं रद्द कर भी देती है, तो इसे आंदोलन की पूरी जीत नहीं माननी चाहिए। उनका मानना है कि अगर वही पुरानी व्यवस्था और लचर सिस्टम लागू रहा, तो कल फिर किसी नई परीक्षा में पेपर लीक या धांधली होगी और छात्रों को दोबारा लाठियां खाने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ेगा। इसलिए, वार्ता में शामिल छात्रों को सरकार के सामने यह मांग डंके की चोट पर रखनी चाहिए कि पूरी बहाली प्रक्रिया में एक स्थायी, पारदर्शी और निष्पक्ष सुधार हो। फॉर्म भरने से लेकर जॉइनिंग लेटर मिलने तक, हर कदम पर अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
'सेटिंग-गेटिंग वाले सिस्टम पर हमेशा के लिए लगे ब्रेक'
छात्र नेता ने इस बात पर खास जोर दिया कि झारखंड में नई भर्ती व्यवस्था ऐसी बने जिसमें किसी भी होनहार और योग्य अभ्यर्थी को 'सेटिंग-गेटिंग' या सिस्टम की किसी भी गड़बड़ी का शिकार न होना पड़े। लाखों युवा अपना घर-परिवार छोड़कर, सालों तक दिन-रात एक करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में परीक्षा में हुई एक छोटी सी धांधली भी उनके सपनों और भविष्य को कुचल देती है। देवेंद्र ने कहा कि सरकार को सिर्फ मौजूदा बवाल को शांत करने के लिए लॉलीपॉप थमाने के बजाय, उन असल कमियों को जड़ से खत्म करना चाहिए जिनकी वजह से परीक्षाओं की विश्वसनीयता कटघरे में खड़ी होती है। प्रश्नपत्र की सुरक्षा, सेंटरों की निगरानी और रिजल्ट तैयार करने में पूरी पारदर्शिता होनी ही चाहिए।
'शरीर अस्पताल में है, पर धड़कनें जयपाल सिंह स्टेडियम में हैं'
लगातार अनशन पर बैठे रहने के कारण देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि, उनका जज्बा अभी भी रत्ती भर नहीं डगमगाया है। उन्होंने बेहद भावुक होते हुए कहा कि भले ही उनका शरीर अस्पताल के बिस्तर पर है, लेकिन उनका मन और धड़कनें अभी भी जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच हैं। उन्होंने सभी आंदोलनकारी साथियों से धैर्य बनाए रखने, एकजुट रहने और हिम्मत न हारने की अपील की है। देवेंद्र को पूरा भरोसा है कि छात्रों की यह अटूट एकता और सड़क पर बहाया गया पसीना जरूर रंग लाएगा और अंत में जीत युवाओं के हक की ही होगी।

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