रांची में अनशन कर रहे एक और छात्र की हालत बिगड़ी, अस्पताल रेफर
राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान एक बार फिर अनशनकारी छात्र की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई।


JPSC-JSSC Protest: राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान एक बार फिर अनशनकारी छात्र की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई। कई दिनों से आमरण अनशन पर डटे छात्र कौशल की हालत नाजुक होने के बाद मौके पर मौजूद साथियों ने उसे आनन-फानन में इलाज के लिए रांची सदर अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों की टीम द्वारा उसका प्राथमिक उपचार किया जा रहा है।
लगातार भूखे रहने से गिरा स्वास्थ्य, अस्पताल में भर्ती
कौशल उन प्रमुख छात्रों में शामिल था जो भर्ती प्रक्रियाओं की निष्पक्ष जांच और परीक्षाओं को रद्द करने की मांग को लेकर लगातार भूख हड़ताल पर बैठे हुए थे। कई दिनों से अन्न-जल त्यागने के कारण उसका शारीरिक स्वास्थ्य तेजी से गिर रहा था। रविवार को अचानक उसकी शारीरिक स्थिति अधिक बिगड़ने लगी और कमजोरी के कारण वह अचेत होने लगा। आंदोलन स्थल पर मौजूद अन्य छात्र नेताओं और समर्थकों ने तत्परता दिखाते हुए एंबुलेंस व निजी वाहन की मदद से उसे तुरंत सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उसका इलाज जारी है।
पहले भी कई अनशनकारी छात्रों की बिगड़ चुकी है हालत
प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता को लेकर चल रहे इस अनिश्चितकालीन आंदोलन में अनशनकारी छात्रों की तबीयत खराब होने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व भी भूख हड़ताल पर बैठी छात्राओं और कई अन्य युवाओं की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। लगातार जारी अनशन और भीषण गर्मी व मानसिक तनाव के चलते आंदोलनकारियों के स्वास्थ्य को लेकर परिजनों और छात्र संगठनों के बीच गहरी चिंता बनी हुई है।
मांगों पर अडिग हैं छात्र, सरकार से ठोस कदम की दरकार
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डटे छात्रों का कहना है कि जब तक राज्य सरकार और संबंधित आयोग उनकी मांगों पर ठोस, पारदर्शी और संतोषजनक निर्णय नहीं लेते, तब तक उनका लोकतांत्रिक संघर्ष और आमरण अनशन जारी रहेगा। छात्रों ने स्पष्ट किया है कि वे अपने भविष्य और लाखों युवाओं के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, भले ही इसके लिए उन्हें अपने स्वास्थ्य को ही क्यों न दांव पर लगाना पड़े। छात्रों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि वह हठधर्मिता छोड़कर तत्काल समाधान की दिशा में ठोस पहल करे।

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