MGCU के लिए बड़ी खबर! 10 साल बाद कैंपस को लेकर सांसद ने किया बड़ा ऐलान
महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के स्थायी कैंपस को लेकर सांसद संजय जायसवाल ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि जो काम 10 वर्षों में पूरा नहीं हो सका, उसे अगले दो साल में पूरा कराया जाएगा।


मोतिहारी: स्थापना के करीब एक दशक बाद भी स्थायी परिसर का इंतजार कर रहे महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय (MGCU) के लिए एक बार फिर उम्मीद जगी है। पश्चिमी चंपारण के सांसद और बिहार भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने दावा किया है कि विश्वविद्यालय का जो काम पिछले 10 वर्षों में पूरा नहीं हो सका, उसे अब अगले दो वर्षों में पूरा कराया जाएगा।
फिलहाल MGCU की शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियां मोतिहारी में अलग-अलग किराए के भवनों से संचालित हो रही हैं। ऐसे में स्थायी कैंपस का मुद्दा लंबे समय से विश्वविद्यालय से जुड़े छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच चर्चा का विषय रहा है।
"अब और इंतजार नहीं"
मोतिहारी पहुंचे डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल से चंपारण की धरती पर केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना बेहतर उद्देश्य के साथ की गई थी। इससे क्षेत्र में उच्च शिक्षा और शोध के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद थी।उन्होंने कहा कि स्थापना के करीब दस साल बाद भी विश्वविद्यालय का अपना कैंपस नहीं होना चिंता की बात है, लेकिन अब इस स्थिति को ज्यादा समय तक जारी नहीं रहने दिया जाएगा।
सांसद का दावा है कि अगले दो वर्षों में MGCU का अपना कैंपस तैयार हो जाएगा। संजय जायसवाल ने बताया कि कैंपस निर्माण को लेकर उच्च शिक्षा विभाग के सचिव से बातचीत हुई है। आने वाले दिनों में प्राक्कलन समिति की बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के मौजूद रहने की बात कही गई है।
इस बैठक में विश्वविद्यालय के स्थायी परिसर से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। सांसद ने संकेत दिया कि अब प्रक्रिया को सिर्फ फाइलों और बैठकों तक सीमित रखने के बजाय संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाकर काम को गति देने की कोशिश होगी।
कुलपति और विभागाध्यक्षों के साथ हुई बैठक
मोतिहारी पहुंचने के बाद सांसद संजय जायसवाल ने महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति और सभी विभागाध्यक्षों के साथ बैठक की। बैठक में विश्वविद्यालय की वर्तमान स्थिति, शैक्षणिक गतिविधियों, आधारभूत संरचना और स्थायी कैंपस से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की गई।
सांसद ने कहा कि विश्वविद्यालय के कुलपति और सभी विभागाध्यक्षों के साथ बैठकर तमाम विषयों पर विस्तार से बातचीत हुई है। अब विश्वविद्यालय के अपने भवन और स्थायी परिसर के निर्माण की दिशा में जल्द काम आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
एक केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए स्थायी परिसर सिर्फ भवन तक सीमित नहीं होता। आधुनिक कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय, छात्रावास, प्रशासनिक भवन और शोध सुविधाओं के विस्तार के लिए एक एकीकृत कैंपस जरूरी है। MGCU के स्थायी कैंपस में देरी के कारण विश्वविद्यालय की गतिविधियां अलग-अलग जगहों पर संचालित हो रही हैं। ऐसे में सांसद का दो साल में कैंपस तैयार कराने का दावा विश्वविद्यालय के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब वादे की असली परीक्षा
संजय जायसवाल के बयान के बाद MGCU से जुड़े लोगों की उम्मीद जरूर बढ़ी है, लेकिन असली चुनौती अब इस दावे को जमीन पर उतारने की है। प्राक्कलन समिति की बैठक, विभागीय मंजूरी और निर्माण प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है—अब इसी पर सबकी नजर रहेगी। दस साल से स्थायी कैंपस का इंतजार कर रहे MGCU के लिए अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कैंपस बनेगा या नहीं, बल्कि यह है कि क्या 10 साल का इंतजार सच में अगले 2 साल में खत्म हो पाएगा?
(मोतिहारी से प्रतिक सिंह की रिपोर्ट)

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