बैरिकेड टूटा, वाटर कैनन चला, फिर बरसी लाठियां! पटना में प्रदर्शन पर PK का बड़ा बयान
पटना में लोकभवन मार्च के दौरान छात्रों और किसानों पर पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और डाकबंगला चौराहे पर लाठीचार्ज किया। प्रशांत किशोर ने सरकार से छात्रों-किसानों की मांगें मानने की अपील की।


पटना: राजधानी पटना में मंगलवार को छात्रों और किसानों के प्रदर्शन के चलते दिनभर सियासी और प्रशासनिक माहौल गरम रहा। लोकभवन मार्च के लिए निकले प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने कई जगह बैरिकेडिंग की। डाकबंगला चौराहे पर प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और लाठीचार्ज भी किया।
छात्र संगठनों और टाउनशिप परियोजना का विरोध कर रहे किसानों पर हुई पुलिस कार्रवाई के बाद मामला राजनीतिक रंग लेता दिखा। बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने सरकार पर निशाना साधते हुए प्रदर्शनकारियों की मांगों को गंभीरता से लेने की बात कही।
‘सरकार छात्रों-किसानों की मांगों को दबा नहीं सकती’
प्रशांत किशोर ने कहा कि छात्रों और किसानों की जायज मांगों को सरकार को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आंदोलन को दबाने के बजाय सरकार को प्रदर्शनकारियों से बातचीत करनी चाहिए।
उन्होंने शिक्षा के निजीकरण, कोचिंग संस्थानों के बढ़ते व्यवसायीकरण, पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को युवाओं की नाराजगी की बड़ी वजह बताया। उनके मुताबिक, इन मुद्दों को लेकर युवाओं का एक बड़ा वर्ग मौजूदा व्यवस्था से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार छात्रों की मांगों को गंभीरता से नहीं लेती है तो आने वाले दिनों में सड़कों पर छात्रों के और बड़े आंदोलन देखने को मिल सकते हैं।
‘छात्र मुझे खोज रहे हैं?’ PK ने दिया जवाब
प्रशांत किशोर ने पिछले कुछ महीनों में देश में लोकतांत्रिक दबाव के असर का जिक्र करते हुए कहा कि पहले आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज करना आम बात थी, लेकिन अब पुलिस कार्रवाई से पहले कई बार सोच रही है। उन्होंने कहा कि इसे लोकतंत्र की ताकत के तौर पर देखा जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने सरकार से छात्रों और किसानों की मांगों पर सकारात्मक पहल करने की अपील भी की। मीडिया कर्मियों ने जब प्रशांत किशोर से पूछा कि प्रदर्शनकारी छात्र उन्हें खोज रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि अगर लोग उन्हें खोज रहे हैं तो वह पटना में ही हैं। उन्होंने कहा, “हम यही पटना में ही हैं, रोज पटना में ही घूम रहे हैं।”
फिलहाल पटना में प्रदर्शन, पुलिस की कार्रवाई और राजनीतिक बयानबाजी ने छात्र-किसान आंदोलन को लेकर बहस तेज कर दी है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों पर बातचीत का रास्ता अपनाती है या आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेता है।

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