Bihar (East Champaran): पूर्वी चंपारण जिले के पताही थाना क्षेत्र के डुमरी बैजू गांव (वार्ड नंबर-2) में मातम पसरा है. जिस आंगन में दो महीने पहले शहनाइयां गूंजी थीं, वहां आज सिसकियां सुनाई दे रही हैं. 23 वर्षीय अमरीश कुमार की हैदराबाद में एक औद्योगिक हादसे में दर्दनाक मौत हो गई. शादी की मेहंदी छूटने से पहले ही उनकी पत्नी का सिंदूर उजड़ गया.
अमरीश 21 जनवरी को रोज़गार के सिलसिले में हैदराबाद गया था. परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उसके कंधों पर थी. 4 दिसंबर 2025 को चंद्रमाला देवी के साथ उसकी शादी हुई थी. विदाई के वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि कुछ ही हफ्तों बाद वही बेटा कफन में लिपटकर घर लौटेगा.
बताया जा रहा है कि शनिवार को फैक्ट्री में ड्यूटी के दौरान एक भारी-भरकम लिफ्ट अचानक उसके ऊपर गिर पड़ी. हादसा इतना भयावह था कि मौके पर ही उसकी मौत हो गई. शव जैसे ही एम्बुलेंस से गांव पहुंचा, मां गीता देवी और पत्नी चंद्रमाला देवी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया. पत्नी बार-बार बेसुध हो जा रही है, जबकि मां की चीखें सुनकर हर आंख नम है.
वहीं अंतिम संस्कार में भारी भीड़ उमड़ पड़ी. पूरे गांव ने नम आंखों से अमरीश को अंतिम विदाई दी. पिता प्रेम महतो मजदूरी कर परिवार चलाते हैं. घर की माली हालत पहले से ही कमजोर थी, अब परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. भाई-बहनों के भविष्य को लेकर भी चिंता गहरा गई है.
ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण यह हादसा हुआ. उनका कहना है कि यदि सुरक्षा इंतजाम पुख्ता होते तो एक होनहार युवक की जान नहीं जाती. गांव वालों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि पीड़ित परिवार को कम से कम 20 लाख रुपये का मुआवजा, आश्रित को सरकारी नौकरी और अन्य आवश्यक सहायता दी जाए.
यह घटना एक बार फिर प्रवासी मजदूरों की असुरक्षित परिस्थितियों को उजागर करती है. रोज़गार की तलाश में दूर शहरों में काम करने वाले हजारों युवाओं की जिंदगी जोखिम में रहती है. अमरीश की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं- क्या फैक्ट्रियों में सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है? क्या प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित है?
रिपोर्ट: प्रतीक सिंह








