21 लोगों की मौत के बाद टूटी वन विभाग की नींद, दंतैल हाथी को पकड़ने के लिए बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन
बेनीसागर ब्लॉक में मझगांव पेट्रोल पंप के पास हाथी के हमले से दो लोगों की मौत हो गई है. चश्मदीदों का कहना है कि हाथी ने दोनों को सुबह 8 बजे पटक-पटककर मार डाला.

JHARKHAND (CHAIBASA): पश्चिमी सिंहभूम जिले में दंतैल हाथी सीरियल किलर बन गया है. झारखंड-ओडिशा सीमा पर बेनीसागर ब्लॉक में मझगांव पेट्रोल पंप के पास हाथी के हमले से दो लोगों की मौत हो गई है. चश्मदीदों का कहना है कि हाथी ने दोनों को सुबह 8 बजे पटक-पटककर मार डाला. घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम और मझगांव थाना की पुलिस मौके पर पहुंच गई. बीते एक हफ्ते में दंतैल हाथी के हमले में अब तक 21 लोगों की जान जा चुकी है.
प. बंगाल व वनतारा से आई टीम, न्यूट्रलाइज करने की कोशिश
हाथी को रेस्क्यू करने के लिए झारखंड वन विभाग की मदद के लिए पश्चिम बंगाल ने भी एक टीम भेजी है. इसके अलावा वनतारा से भी एक टीम आई है. ताजा सूचना ये है कि बेनीसागर गांव के पास वन विभाग की टीम ने हाथी को चारों ओर से घेर लिया है. उसे न्यूट्रलाइज करने की कोशिश जारी है. ऐसी ही एक कोशिश में बंगाल वन विभाग का एक कर्मी बुरी तरह घायल हो गया.
21 लोगों की जान जाने के बाद हरकत में आया वन विभाग
दंतैल हाथी पहली बार तब खबर बना जब एक जनवरी को उसने टोंटो में तीन को कुचल कर मार डाला, हमले में दो लोग घायल हो गए. दो जनवरी को गोइलकेरा में हाथी ने एक बच्चे को कुचल कर मार डाला. 04 जनवरी को गोइलकेरा में दंतैल हाथी ने एक महिला को कुचलकर मार डाला. 05 जनवरी को गोइलकेरा में हाथी ने हमला कर जोंगा लागुरी की जान ली .06 जनवरी को दंतैल हाथी ने गोइलकेरा के सोवा गांव में हमला कर तीन की जान ले ली. 07 जनवरी को दंतैल हाथी ने 21 साल के जगमोहन को कुचल कर मार डाला. हफ्ते भर में 21 लोगों की जान जाने के बाद वन विभाग हरकत में आया और इसकी तलाश शुरू की गई.
जुलाई व दिसंबर में हाथी खास तौर पर हो जाते हैं आक्रामक
हाथी एक रात में 25 किमी तक सफर कर लेता है जिससे उसको ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता है. दंतैल हाथी के गुस्से की वजह को लेकर जानकारों का कहना है कि – हाथी बीमार हो या उसे शरीर में कहीं दर्द हो तो वो बेहद एग्रेसिव हो जाते हैं. अपने झुंड से बिछड़ जाने पर भी वो आक्रामक हो जाते हैं. डाक्टरों के मुताबिक बच्चों के अलग होने से हाथी में हार्मोनल चेंज आता है, इससे भी वो आक्रामक हो जाते हैं. वन्य जीव एक्सपर्ट की मानें तो खास तौर पर झारखंड और छत्तीसगढ़ के हाथी इसलिए चिड़चिड़े हो रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है इंसान उनके क्षेत्र में घुसपैठ कर रहे है. इसके अलावा जुलाई और दिसंबर में हाथी खास तौर पर आक्रामक होते हैं. इन दो महीने में वे मादा हाथी की तलाश करते हैं मादा हाथी के नहीं मिलने पर मदमस्त हाथी उत्पात मचाते हैं.
रिपोर्ट : रमेश दास









