आपत्तिजनक हालत में पकड़ाया शादीशुदा प्रेमी जोड़ा, गांव वालों के आक्रोश का बना शिकार
प्रेम-प्रसंग का एक ऐसा मामला झारखंड के दुमका से सामने आया है जिसने रिश्तों, नैतिकता और कानून के टकराव की स्थिति को जन्म दे दिया है. एक प्रेमी जोड़ा जो पहले से ही शादीशुदा है. उनके साथ रहने पर कानून, परिजन और गांव वाले सभी को ऐतराज है. हिन्दू विवाह अधिनियम भी इसकी अनुमति नहीं देता.

JHARKHAND (DUMKA): दुमका जिला के जामा थाना अंतर्गत नावाडीह गांव में सोमवार की रात उस वक्त हड़कंप मच गया, जब ग्रामीणों ने एक शादीशुदा प्रेमी जोड़े को आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया. गुस्साए ग्रामीणों ने दोनों की पिटाई कर रस्सी से बांध दिया और पूरी रात उन्हें बंधक बनाकर रखा.

ग्रामीणों के शक ने खोला राज
जानकारी के अनुसार प्रदीप मंडल गांव में ग्राहक सेवा केंद्र चलाता है और पहले से शादीशुदा है. इसके बावजूद उसका गांव की ही एक विवाहित महिला से प्रेम संबंध चल रहा था. महिला का पति रोजी-रोटी के सिलसिले में बाहर रहता है. सोमवार की रात प्रदीप महिला के घर पहुंचा, तभी महिला के देवर को शक हुआ.
दरवाजा खुलते ही भड़का आक्रोश
देवर द्वारा लगातार दरवाजा पीटने के बाद जब काफी देर से दरवाजा खोला गया, तो कमरे के अंदर प्रदीप और महिला को एक साथ देखकर वह सन्न रह गया. इसके बाद शोर मचने लगा, जिससे ग्रामीण मौके पर जुट गए. आक्रोशित ग्रामीणों ने दोनों को रस्सी से बांधकर रख लिया.
मंगलवार सुबह पहुंची पुलिस और महिला के मायके वाले
घटना की सूचना मंगलवार सुबह जामा थाना पुलिस को दी गई. साथ ही महिला के मायके पक्ष को भी जानकारी दी गई. मायके वाले मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों के बीच बातचीत शुरू हुई. इसी दौरान पुलिस ने मौके पर पहुंचकर प्रेमी जोड़े को ग्रामीणों के चंगुल से मुक्त कराया.
प्रेमी जोड़े ने थाना में दिया लिखित बयान
पुलिस दोनों को जामा थाना लेकर पहुंची, जहां प्रेमी जोड़े ने लिखित बयान दिया कि वे दोनों बालिग हैं और अपनी मर्जी से साथ रहना चाहते हैं. बयान के आधार पर पुलिस ने किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की और दोनों को छोड़ दिया.
गांव में चर्चा, समाज में मंथन
इस घटना के बाद पूरे इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. ग्रामीणों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या विवाहेत्तर संबंध इतने मजबूत हो सकते हैं कि लोग अपना बसा-बसाया घर और परिवार छोड़ने को तैयार हो जाएं.
कानून बनाम सामाजिक सोच
मामले ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि कानून जहां बालिगों की सहमति को प्राथमिकता देता है, वहीं समाज ऐसी घटनाओं को आज भी स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है. दुमका की यह घटना रिश्तों, नैतिकता और कानून के टकराव की एक जिंदा मिसाल बनकर सामने आई है.
रिपोर्ट: विजय तिवारी
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