Accident में टूटे थे जुल्फिकार के पैर, ऑपरेशन के दौरान हो गई मौत, अस्पताल पर लग रहे लापरवाही के आरोप
बिहार के मुंगेर में एक निजी अस्पताल के डॉक्टरों पर लापरवाही के कारण एक मरीज की मौत के आरोप लग रहे हैं. जुल्फिकार अपने घर का इकलौता कमाने वाला था, एक सड़क हादसे में उसके पैर में गंभीर चोट आई थी, जिसका इलाज चल रहा था..

Bihar (Munger): जिले में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. शहर के एक निजी अस्पताल में पैर के ऑपरेशन के दौरान 35 वर्षीय युवक की मौत हो गई. घटना से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा और तोड़फोड़ की. हालात बिगड़ते देख डॉक्टर सहित अस्पताल के सभी कर्मी फरार हो गए. सूचना मिलने पर कोतवाली थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने में जुट गई.
हादसो में हो गया था गंभीर रूप से घायल
मृतक की पहचान पूरब सराय थाना क्षेत्र निवासी जुल्फिकार आलम के रूप में हुई है. परिजनों के अनुसार, करीब एक सप्ताह पूर्व जुल्फिकार अपनी मामी को बाइक से लेकर जा रहा था. इसी दौरान असरगंज–मकवा मुख्य पथ पर बाइक और ऑटो की आमने-सामने टक्कर हो गई. इस हादसे में जुल्फिकार गंभीर रूप से घायल हो गया और उसका बायां पैर बुरी तरह जख्मी हो गया. स्थानीय लोगों की मदद से उसे असरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार किया और पैर टूटने की पुष्टि की.
बेहतर इलाज के नाम पर निजी अस्पताल में कराया गया भर्ती
प्राथमिक उपचार के बाद परिजन उसे बेहतर इलाज के लिए मुंगेर ले आए और शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया. परिजनों का आरोप है कि यहां सर्जन डॉ. आर.के. गुप्ता ने जांच के बाद कहा कि कुछ दिनों बाद पैर का ऑपरेशन किया जाएगा और मरीज जल्द ही चलने लगेगा. इलाज और ऑपरेशन के नाम पर 65 हजार रुपये की मांग की गई, जिसमें से परिजनों ने 35 हजार रुपये तत्काल जमा कर दिए.रविवार की सुबह करीब नौ बजे जुल्फिकार के बाएं पैर का ऑपरेशन किया गया. परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन के बाद जब मरीज को वार्ड में लाया गया तो उसे अचानक सीने में तेज दर्द होने लगा. इस बारे में डॉक्टर और अस्पताल कर्मियों को बताया गया, लेकिन उन्होंने इसे सामान्य बताते हुए अनदेखी कर दी.
संसाधनों की कमी, इलाज के अभाव में मौत
परिजनों के अनुसार, कुछ ही देर में जुल्फिकार की हालत लगातार बिगड़ने लगी. आरोप है कि अस्पताल में न तो आईसीयू की सुविधा थी और न ही आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक चिकित्सा संसाधन उपलब्ध थे. स्थिति गंभीर होने पर उसे दूसरे अस्पताल ले जाने की तैयारी की गई, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई.
मौत के बाद अस्पताल में अफरा-तफरी
जुल्फिकार की मौत की खबर मिलते ही परिजन भड़क उठे और अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा शुरू कर दिया. आक्रोशित भीड़ ने अस्पताल में तोड़फोड़ भी की. हालात बिगड़ते देख डॉक्टर, कंपाउंडर और अन्य कर्मी अस्पताल छोड़कर फरार हो गए. घटना के दौरान अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों के परिजन भी भयभीत होकर अपने मरीजों को लेकर वहां से निकल गए, जिससे अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया.
ऑपरेशन थियेटर पर गंभीर सवाल
मृतक के परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि अस्पताल का ऑपरेशन थियेटर सरकारी मानकों के अनुरूप नहीं था. आरोप है कि ऑपरेशन एलईडी बल्ब की रोशनी में किया गया. वहां न तो समुचित साफ-सफाई थी और न ही आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उचित व्यवस्था. परिजनों का कहना है कि ऐसे हालात में ऑपरेशन करना मरीज की जान से खिलवाड़ है.
परिवार का एकमात्र सहारा था जुल्फिकार
जुल्फिकार आलम परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था. वह मूल रूप से असरगंज प्रखंड के विशनपुर पंचायत अंतर्गत खरवा गांव का निवासी था. कुछ वर्ष पहले वह जमालपुर स्थित रेल को-ऑपरेटिव बैंक में कार्यरत था, लेकिन नौकरी छूटने के बाद मुंगेर में अपने मामा के घर रहकर छोटा-मोटा व्यवसाय कर परिवार का भरण-पोषण कर रहा था. उसकी मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है.
डॉक्टर के खिलाफ शिकायत, पुलिस कर रही जांच
मृतक के परिजनों ने डॉ. आर.के. गुप्ता के खिलाफ कोतवाली थाना में लिखित आवेदन देकर लापरवाही से मौत का आरोप लगाया है. पुलिस ने आवेदन स्वीकार कर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मुंगेर सदर अस्पताल भेज दिया है. कोतवाली थाना पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इस घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों की मनमानी और स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
रिपोर्ट: सुमित कुमार
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