'ज्यादा पढ़-लिखकर इंजीनियर नहीं बनना है...', कोडरमा कस्तूरबा स्कूल की छात्राओं का फूटा गुस्सा, रो-रोकर बयां किया दर्द
कोडरमा प्रखंड के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में स्वतंत्रता दिवस का जश्न उस वक्त हंगामे में तब्दील हो गया, जब छात्राओं के सब्र का बांध टूट गया।


Koderma: कोडरमा प्रखंड के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में स्वतंत्रता दिवस का जश्न उस वक्त हंगामे में तब्दील हो गया, जब छात्राओं के सब्र का बांध टूट गया। अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और अभिभावकों की मौजूदगी में छात्राओं ने विद्यालय की वार्डन प्रतीक्षा मिंज और वहां की लचर शिक्षण व्यवस्था के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया। छात्राओं ने रो-रोकर अपना दर्द बयां किया, जिसने वहां मौजूद हर किसी को झकझोर कर रख दिया।
'ज्यादा पढ़-लिखकर इंजीनियर नहीं बनना है'
छात्राओं ने स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों पर कई बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि परीक्षाएं सिर पर हैं, लेकिन शिक्षकों की कमी और लापरवाही के कारण अब तक सिलेबस पूरा नहीं हुआ है। छात्राओं का दर्द है कि कई शिक्षक नियमित रूप से क्लास नहीं लेते और जब वे पढ़ाई को लेकर सवाल पूछती हैं या विरोध करती हैं, तो उन्हें यह कहकर चुप करा दिया जाता है कि "ज्यादा पढ़-लिखकर इंजीनियर नहीं बनना है।"
इतना ही नहीं, छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने पर उन्हें स्कूल से टीसी (Transfer Certificate) काटकर घर भेज देने की धमकियां दी जाती हैं।
अधिकारियों ने कराया शांत, 2 दिन में समाधान का वादा
स्वतंत्रता दिवस जैसे खास मौके पर छात्राओं के इस उग्र विरोध को देखकर प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। मौके पर मौजूद बीडीओ सह सीओ, जिला परिषद सदस्य प्रतिनिधि धनंजय यादव और थाना प्रभारी ने किसी तरह स्थिति को संभाला। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने रोती-बिलखती छात्राओं को शांत कराया और उन्हें सख्त आश्वासन दिया है कि अगले दो दिनों के भीतर एक विशेष बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें उनकी सभी समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जाएगा।
वार्डन ने नकारे आरोप, कहा- 'शिक्षकों की है भारी कमी'
इन गंभीर आरोपों पर विद्यालय की वार्डन प्रतीक्षा मिंज ने अपना बचाव किया है। उन्होंने छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार और धमकी देने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। हालांकि, वार्डन ने यह जरूर माना कि स्कूल में शिक्षकों की भारी कमी है, जिसका सीधा असर बच्चियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
स्कूल में शिक्षकों की स्थिति एक नजर में
1. कक्षा 6 से 12 तक : कुल 362 छात्राएं नामांकित हैं।
2. कक्षा 6 से 8 की स्थिति : स्वीकृत 5 पदों में से केवल 3 शिक्षक ही काम कर रहे हैं। बाकी 2 शिक्षक डोमचांच स्थित झारखंड आवासीय विद्यालय में प्रतिनियुक्ति पर हैं। यहां गणित और विज्ञान के शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं।
कक्षा 9 से 12 की स्थिति: 5 स्वीकृत पदों में से 4 शिक्षक (हिंदी, अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान और विज्ञान) कार्यरत हैं। गणित के शिक्षक की कुर्सी यहां भी खाली है, जिसके चलते विज्ञान के शिक्षक को ही गणित पढ़ाना पड़ रहा है।
वार्डन का दावा है कि जितने भी शिक्षक मौजूद हैं, वे नियमित रूप से अपनी कक्षाएं ले रहे हैं। बहरहाल, अब सभी की नजरें प्रशासन द्वारा बुलाई जाने वाली उस बैठक पर टिकी हैं, जो अगले दो दिनों में होनी है। इस बैठक में ही यह तय होगा कि छात्राओं के आंसुओं का क्या इंसाफ होता है और विद्यालय में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है।

specializes in local and regional stories, bringing simple, factual, and timely updates to readers.
Related Posts

कोलकाता चप्पल खरीदने जा रहे रांची के दो चचेरे भाइयों की खड़गपुर में दर्दनाक मौत, 6 महीने की बच्ची के सिर से उठा पिता का साया

20 अगस्त को रांची में बड़ा आंदोलन!, JPSC-JSSC छात्रों के CM आवास घेराव को लेकर पुलिस अलर्ट, 2,000 जवान होंगे तैनात







