अवैध नर्सिंग होम पर कार्रवाई के बाद 48 घंटे तक FIR क्यों नहीं? स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
रिया पॉली क्लिनिक में गंभीर अनियमितताएं मिलने के बाद उसे सील कर दिया गया, लेकिन FIR दर्ज कराने में 48 घंटे की देरी ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए। बाद में SDO के हस्तक्षेप के बाद मामला दर्ज हुआ।


सुपौल: शहर में अवैध तरीके से चल रहे रिया पॉली क्लिनिक पर कार्रवाई के बाद अब स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। क्लिनिक में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं और उसे सील कर दिया गया, फिर भी लगभग 48 घंटे तक प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की गई, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यह भी चर्चा का विषय है कि अगर अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) हस्तक्षेप नहीं करते, तो क्या मामला आगे बढ़ पाता?
30 जुलाई को नगर परिषद के वार्ड संख्या-26 में स्थित रिया पॉली क्लिनिक पर अनुमंडल पदाधिकारी मनोहर कुमार साहू, सिविल सर्जन डॉ. बाबू साहब झा, प्रखंड विकास पदाधिकारी निशांत कुमार, अंचलाधिकारी मनीष कुमार और स्वास्थ्य विभाग तथा प्रशासन की एक संयुक्त टीम ने छापेमारी की। जांच के दौरान यह आरोप लगाया गया कि क्लिनिक में बिना वैध दस्तावेज, योग्य चिकित्सक के बिना और नियमों की अनदेखी करते हुए काम किया जा रहा था। इसके बाद अधिकारियों ने तुरंत संस्थान को सील कर दिया।
48 घंटे तक FIR क्यों नहीं? SDO के हस्तक्षेप के बाद दर्ज हुआ मामला
कार्रवाई के बावजूद, सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जांच में गंभीर अनियमितताएं पहले ही उजागर हो चुकी थीं, तो सदर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए आवेदन भेजने में 48 घंटे की देरी क्यों हुई? सूत्रों के मुताबिक, मामले में अनुमंडल पदाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद ही सदर थाना को आवेदन दिया गया, जिसके आधार पर रिया पॉली क्लिनिक के खिलाफ अवैध नर्सिंग होम संचालन के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई।
स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल
पूरे घटनाक्रम के बाद स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा हो रही है कि अगर समय पर हस्तक्षेप नहीं किया जाता, तो मामला ठंडे बस्ते में भी जा सकता था। इसके साथ ही यह भी पूछा जा रहा है कि शहर में कथित रूप से वर्षों से चल रहे अन्य अवैध नर्सिंग होमों पर क्या इसी तरह की सख्त कार्रवाई की जाएगी या नहीं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया अभी भी जारी है।
(सुपौल से कुंदन कुमार की रिपोर्ट)

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