फरक्का जल संधि पर JDU का बड़ा अभियान, बक्सर से शुरू हुआ ‘नीतीश संवाद’
फरक्का जल संधि को लेकर JDU ने बिहार में ‘नीतीश संवाद’ अभियान शुरू किया है। बक्सर से अभियान की शुरुआत करते हुए संजय झा और उमेश कुशवाहा ने गंगा की स्थिति का जायजा लिया।


बक्सर: फरक्का जल संधि को लेकर जनता के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए जेडीयू ने बिहार में ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम की शुरुआत की है। इसकी शुरुआत शनिवार को बक्सर जिले से हुई। कार्यक्रम में जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा, विधायक संतोष कुमार निराला और राहुल कुमार सिंह समेत पार्टी के कई नेता शामिल हुए।
नीतीश संवाद के तहत जेडीयू नेताओं ने गंगा नदी की स्थिति का जायजा लिया और स्थानीय लोगों एवं प्रबुद्धजनों से बातचीत कर फरक्का बराज और फरक्का जल संधि से जुड़े मुद्दों पर उनकी राय और अनुभव जाने।
रामेश्वर नाथ मंदिर में पूजा, फिर गंगा का लिया जायजा
कार्यक्रम से पहले संजय झा और उमेश सिंह कुशवाहा ने बक्सर के रामरेखा घाट स्थित श्री रामेश्वर नाथ मंदिर में भगवान शिव की पूजा-अर्चना की। नेताओं ने क्षेत्रवासियों की सुख-शांति और खुशहाली की कामना की।
इसके बाद दोनों नेता बिहार सीमा के निकट तीन मुहानी यानी चरित्रवन पहुंचे। यहां उन्होंने गंगा नदी की स्थिति का स्थल निरीक्षण किया। जेडीयू नेताओं के मुताबिक, यह वही इलाका है जहां से गंगा बिहार में प्रवेश करती है।
इस दौरान संजय झा ने बक्सर सेंट्रल जेल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान जेडीयू के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी इसी जेल में बंद रहे थे।
‘फरक्का संधि के कारण बिहार को नुकसान हुआ’
स्थानीय लोगों के साथ संवाद के दौरान गंगा की सालभर की स्थिति और फरक्का बराज से जुड़े प्रभावों पर चर्चा की गई। संजय झा ने कहा कि ‘नीतीश संवाद’ का उद्देश्य फरक्का जल संधि को लेकर बिहार के लोगों के बीच जन-जागरूकता पैदा करना है।
उन्होंने दावा किया कि 1996 में हुई फरक्का जल संधि के समय बिहार के साथ अन्याय हुआ और पिछले करीब 30 वर्षों में राज्य को इसका नुकसान उठाना पड़ा। संजय झा ने कहा कि जेडीयू और नीतीश कुमार शुरुआत से ही फरक्का बराज और फरक्का जल संधि का विरोध करते रहे हैं।
संजय झा ने कहा कि संधि की 30 वर्ष की अवधि इस साल दिसंबर में समाप्त हो रही है। जेडीयू का मत है कि इसका नवीनीकरण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आगे की किसी भी व्यवस्था में बिहार की वर्ष 2050 तक की जल जरूरतों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
‘बिहार के हित में एकजुट हों लोग’
जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि नदी के पानी पर अधिकार का सवाल बिहार के हर व्यक्ति के हित से जुड़ा है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि करीब 30 साल पहले बिहार सरकार और राज्य के लोगों से चर्चा किए बिना ही बिहार के हितों की बलि दे दी गई।
संजय झा ने कहा कि नीतीश संवाद के जरिए पार्टी बिहार के लोगों को इस मुद्दे के प्रति जागरूक करना चाहती है, ताकि राज्य के लोग आगे एकजुट होकर बिहार के हितों की आवाज उठा सकें।
जेडीयू की ओर से फरक्का जल संधि को लेकर यह अभियान अब बिहार के दूसरे हिस्सों में भी चलाया जाएगा। पार्टी का फोकस इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने और राज्य की जल जरूरतों से जोड़कर राजनीतिक एवं सामाजिक बहस खड़ी करने पर है।
(गिरीश शंकर की रिपोर्ट )

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