India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका ने अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक संयुक्त बयान जारी किया है, जिस पर आने वाले हफ्तों में औपचारिक रूप से हस्ताक्षर होने की उम्मीद है. इसके साथ ही, भारत के निर्यात पर पारस्परिक शुल्क घटकर 18% हो गया है. साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से कच्चे तेल की खरीद पर भारत द्वारा लगाए गए 25% शुल्क को रद्द करने वाले एक कार्यकारी आदेश पर भी हस्ताक्षर किए हैं.
संयुक्त बयान में कहा गया है, "अमेरिका और भारत यह घोषणा करते हुए प्रसन्न हैं कि वे पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार से संबंधित एक अंतरिम समझौते के लिए एक रूपरेखा पर सहमत हो गए हैं". भारत पर शुल्क में कटौती के साथ-साथ, भारत भी सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और कुछ अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क को समाप्त या कम करेगा.
इस व्यापार समझौते से भारत को क्या होगा लाभ?
मूलतः, 18% की टैरिफ दर के साथ, भारत को श्रम प्रधान निर्यात-उन्मुख क्षेत्रों में क्षेत्रीय समकक्षों की तुलना में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्राप्त होता है. भारत की 18% टैरिफ वियतनाम, बांग्लादेश, चीन, थाईलैंड, पाकिस्तान और इंडोनेशिया की तुलना में कम है. भारत की 18% की टैरिफ दर भी ट्रंप प्रशासन द्वारा अगस्त 2025 में लगाए गए 50% टैरिफ की तुलना में काफी कम है.
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, इस व्यापार समझौते से भारतीय निर्यात के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर के बाजार का द्वार खुल गया है. इस संदर्भ में, अंतरिम व्यापार समझौता विशेष रूप से लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), किसानों और मछुआरों को लाभ पहुंचाएगा. कपड़ा, चमड़ा, रत्न और आभूषण, फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी, ऑटोमोबाइल आदि क्षेत्रों को विशेष लाभ प्राप्त होंगे. कई श्रम-प्रधान क्षेत्रों को भी इस व्यापार समझौते से फायदा होगा.
कई उत्पादों पर शुल्क घटकर शून्य हो जाएंगे, जैसे रत्न और हीरे, विमान के पुर्जे, सामान्य दवाइयां. इससे भारत के 'मेक इन इंडिया' अभियान को लाभ होगा. भारत को ऑटोमोबाइल पुर्जों के लिए तरजीही शुल्क दर कोटा भी मिलेगा. यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरों को समाप्त करने के लिए लगाए गए शुल्कों के अधीन होगा.
भारत और अमेरिका तकनीकी उत्पादों के व्यापार को बढ़ावा देने पर भी ध्यान देंगे. इसमें ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट और डेटा केंद्रों में उपयोग होने वाले अन्य सामान शामिल हैं, और संयुक्त तकनीकी सहयोग का विस्तार करेंगे.
सरकार द्वारा गिनाए जा रहे फायदे
- निर्यातकों के लिए बड़ी जीत, निर्यात आधारित विकास को बढ़ावा
- अनुपालन कम होगा, प्रक्रियात्मक विलंब में कमी आएगी
- अमेरिकी सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी उत्पादों तक त्वरित पहुंच
- डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए बड़ा प्रयास
- इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना
- घरेलू विनिर्माण को भारी समर्थन
- उपभोक्ताओं को कम लागत का लाभ मिलता है.
- रोजगार सृजन से कई लघु एवं मध्यम उद्यमों और स्टार्टअप्स को लाभ होगा.
- डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करना
- भारत के डिजिटल एआई इकोसिस्टम को गति प्रदान करना
- जीपीयू और डेटा सेंटर उपकरण जैसे तकनीकी उत्पादों में व्यापार में वृद्धि
- अत्याधुनिक तकनीक तक बेहतर पहुंच के साथ हमारी कंपनियों के लिए लागत कम होगी.
- अधिक निवेश, कौशल विकास, रोजगार, विनिर्माण साझेदारी
- इससे हमारे निर्यातकों को बार-बार परीक्षण और प्रमाणन से बचने में मदद मिलती है.
- कम लागत, अमेरिकी बाजारों में प्रवेश करने का समय
- भारतीय लघु एवं मध्यम उद्यमों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत होने में सहायता प्रदान करें.
- भारतीय उत्पादों को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने में सहायता करें.
रूसी तेल आयात पर लग जाएगी रोक?
भारत और यूएस के बीच हुए इस तथाकथित व्यापार समझौते के बाद यह मुद्दा गरमाया हुआ है कि क्या भारत अब रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा! इससे संबंधित केंद्र सरकार की तरफ से अब तक कोई स्पष्टीकरण नहीं मिला है. वहीं यूस प्रेसिडेंट ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में ट्वीट कर यह जानकारी दी है कि भारत रूसी तेल न खरीदने पर सहमत हो गया है. ट्रंप ने यह भी लिखा कि भारत अब अपनी तेल आपूर्ति रूस के बदले अमेरिका और वेनेजुएला से पूरा करेगा.
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एक प्रेसवार्ता कर उक्त समझौते से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से जानकारी दी. लेकिन रूस से तेल खरीद को लेकर कुछ भी स्पष्ट नहीं किया.
रूसी तेल नहीं खरीदने का भारत ने दिया आश्वासन- ट्रंप
ताजा एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में ट्रंप ने कहा कि भारत ने आश्वासन दिया है कि वह सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से रूस से तेल नहीं खरीदेगा. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दस वर्षों में भारत अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाएगा. यह टिप्पणी इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि भारत रूस के साथ रक्षा उपकरणों के क्षेत्र में लंबे समय से सहयोग करता रहा है. बता दें कि ट्रंप के इन दावों पर भारत ने अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.








