Chaitra Navratri 2026: इस साल के चैत्र नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च (बृहस्पतिवार) से होने जा रही है. नवरात्र मुख्यत: साल में दो बार मनाया जाता है- एक चैत्र और दूसरा आश्विन माह में. आश्विन माह में मनाए जाने वाले नवरात्र को शरद नवरात्र भी कहा जाता है. आमतौर पर इसी नवरात्र उत्सव की धूम ज्यादा होती है. इसके कई कारण हो सकते हैं. मान्यता की यदि बात करें तो आश्विन के नवरात्र की मान्यता अधिक मानी जाती है. हम इस लेख में चैत्र नवरात्र के महत्व पर चर्चा करने और समझने का प्रयास करेंगे.
धर्म गुरु श्री श्री रविशंकर के शब्दों में कहें तो ‘चैत्र’ का अर्थ है नव वर्ष का आरंभ. इसलिए नव वर्ष का आगमन नौ दिन के लिए अंतर्मुखी होने से, जिसमें प्रार्थना, ध्यान और जाप का समावेश होता है, मनाया जाता है. इस प्रकार हम समूची सृष्टि में उपस्थित उस दिव्यता को स्वीकार करते हैं और इस को अनुभव करते हैं.
चैत्र और शरद नवरात्रि में मुख्य अंतर
चैत्र नवरात्रि और शरद नवरात्रि के बीच मुख्य अंतर उनके समय और प्रकृति का है. चैत्र नवरात्रि हिंदू नववर्ष के आरम्भ (मार्च-अप्रैल) में आती है, जो ‘सृजन’ का प्रतीक है. वहीं, शरद नवरात्रि शरद ऋतु (सितंबर-अक्टूबर) में आती है, जो ‘बुराई पर अच्छाई की जीत’ और सर्दियों के आगमन का प्रतीक है. आध्यात्मिक रूप से माना जाता है कि, दोनों ही समय प्रकृति में बड़े बदलाव के होते हैं जब ध्यान और साधना का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है.
चैत्र नवरात्र का आध्यात्मिक महत्व
चैत्र नवरात्रि वसंत ऋतु के दौरान मनाई जाती है. यह समय नई शुरुआत और नव-ऊर्जा का होता है. आध्यात्मिक रूप से, यह अंतर्मुखी होने और अपने भीतर के आनंद को खोजने का समय है. इस समय की गई साधना मन को शांत करती है और शरीर को ऊर्जावान बनाती है ताकि हम पूरे वर्ष के लिए तैयार हो सकें.
शरद नवरात्र को अधिक महत्व क्यों दिया जाता है?
शरद नवरात्रि को ‘महा नवरात्रि’ भी कहा जाता है. यह देवी दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध की याद में मनाई जाती है. यह समय तामसिक और राजसिक प्रवृत्तियों को नष्ट कर सात्विकता को जगाने का है. इस दौरान वातावरण में एक विशेष ऊर्जा होती है जो प्रार्थना और ध्यान को बहुत गहरा बना देती है.
नवरात्र के उपवास के पीछे के वैज्ञानिक कारण
नवरात्रि दो ऋतुओं के संधिकाल पर आती है. इस समय हमारा पाचन तंत्र कमजोर होता है और शरीर को बीमारियों से बचने के लिए शुद्धिकरण की आवश्यकता होती है. हल्का भोजन या उपवास करने से शरीर की शुद्धि होती है, जिससे मानसिक स्पष्टता और शारीरिक स्फूर्ति बढ़ती है.
नवरात्रि के नव दिनों का महत्व
नवरात्रि के नौ दिन प्रकृति के तीन गुणों – तमस, रजस और सत्व पर विजय पाने की यात्रा हैं. पहले तीन दिन तमस (जड़ता), अगले तीन दिन रजस (गतिशीलता) और अंतिम तीन दिन सत्व (शुद्धता और ज्ञान) को संतुलित करने के लिए समर्पित हैं. दसवाँ दिन ‘विजयदशमी’ है, जो इन तीनों गुणों से ऊपर उठकर अपनी चेतना में स्थित होने का प्रतीक है.






