JHARKHAND (RANCHI): झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा के कर्मचारियों और प्रबंधन (सम्मान फाउंडेशन) के बीच विवाद गहरा गया है। 'भारतीय मजदूर संघ' से संबद्ध 'झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ' ने संस्था पर तानाशाही और श्रमिक अधिकारों के हनन का आरोप लगाते हुए आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो पूरे राज्य में एंबुलेंस सेवाएं ठप कर दी जाएंगी। विवाद की जड़: शांतिपूर्ण प्रदर्शन और निलंबन मामले की शुरुआत 13 मार्च 2026 को हुई, जब कर्मचारियों ने पीएफ (PF), ईएसआईसी (ESIC), ग्रेच्युटी और न्यूनतम मजदूरी की मांग को लेकर श्रम भवन के समक्ष शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था। संघ का आरोप है कि इस प्रदर्शन के बाद सम्मान फाउंडेशन ने बदले की भावना से कार्रवाई करते हुए कई कर्मचारियों को बिना पूर्व सूचना के सेवा से मुक्त कर दिया और दर्जनों को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किए। समझौते की अनदेखी से बढ़ा आक्रोश संघ के प्रदेश अध्यक्ष नीरज तिवारी के अनुसार, 23 मार्च को एनएचएम (NHM) प्रबंधन की मध्यस्थता में हुई बैठक में सहमति बनी थी कि स्पष्टीकरण मिलने के बाद सेवा समाप्ति के आदेश वापस लिए जाएंगे। हालांकि, संस्था इस समझौते का पालन नहीं कर रही है। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें 'एस्मा' (ESMA) का डर दिखाकर डराया जा रहा है और अवैध रूप से जिला स्थानांतरण किया जा रहा है। प्रमुख मांगें और अल्टीमेटम संघ ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
सेवा समाप्ति और निलंबन के आदेश तत्काल रद्द हों।
हटाए गए कर्मचारियों की कार्यस्थल पर वापसी सुनिश्चित हो।
सभी श्रमिक अधिकारों (न्यूनतम वेतन, ग्रेच्युटी) का पूर्ण पालन हो। नीरज तिवारी ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रशासन और संस्था ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रबंधन की होगी।









