Video! : सड़क पर सन्नाटा, गले में फंदा और गूंजते नारे..., प्रोजेक्ट भवन के बाहर ये क्या हो गया?
राजधानी रांची के धुर्वा इलाके में अचानक माहौल उस वक्त बेहद तनावपूर्ण हो गया, जब लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे चयनित अभ्यर्थियों का सब्र टूट गया।

JSSC-CGL Protest: राजधानी रांची के धुर्वा इलाके में गुरुवार को अचानक माहौल उस वक्त बेहद तनावपूर्ण हो गया, जब लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे चयनित अभ्यर्थियों का सब्र टूट गया। प्रोजेक्ट भवन (सचिवालय) के सामने चल रहा इन युवाओं का आंदोलन अब इतना उग्र हो चुका है कि इन्होंने सीधे तौर पर सिस्टम के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। न्याय की गुहार लगाते-लगाते थक चुके इन युवाओं का यह खौफनाक रूप देखकर वहां मौजूद हर कोई हैरान रह गया।
गले में फांसी का फंदा और गगनभेदी नारों की गूंज
गुरुवार की सुबह प्रोजेक्ट भवन के मुख्य द्वार का नजारा जिसने भी देखा, उसकी रूह कांप गई। कई आक्रोशित अभ्यर्थी अपने ही हाथों से अपने गले में फांसी का फंदा डालकर बीच सड़क पर धरने पर बैठ गए। कुछ ही देर में पूरा इलाका 'आवाज दो हम एक हैं' और 'न्याय दो या फांसी दो' के गगनभेदी नारों से गूंज उठा। इन युवाओं की आंखों में जहां एक तरफ अपने छिनते हुए भविष्य का डर साफ झलक रहा था, वहीं दूसरी तरफ सरकार और प्रशासन के खिलाफ गुस्से की ज्वाला धधक रही थी।
'शांतिपूर्ण तरीके से बात रखी, पर सिस्टम ने आंखें मूंद लीं'
सड़क पर उतरे इन चयनित अभ्यर्थियों का दर्द छलक कर बाहर आ रहा है। उनका कहना है कि वे रातों-रात इस तरह उग्र नहीं हुए हैं और न ही उन्हें हंगामा करने का कोई शौक है। पिछले काफी लंबे समय से वे बेहद शांतिपूर्ण तरीके से अपनी जायज मांगों को सरकार के सामने रख रहे थे। लेकिन, ऐसा लगता है कि जैसे प्रशासन और सरकार ने उनकी तकलीफों से पूरी तरह से आंखें और कान दोनों बंद कर लिए हैं। महीनों से लगातार हो रही इसी अनदेखी और सिस्टम की बेरुखी ने उन्हें आज इतना खौफनाक कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है।
अब कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा, भविष्य के साथ हो रहा खिलवाड़
गले में फंदा डाले बैठे इन बेरोजगार युवाओं ने भारी मन से कहा कि वे लगातार सरकार का दरवाजा खटखटा रहे हैं, लेकिन उन्हें इंसाफ की जगह सिर्फ तारीखें और निराशा ही हाथ लगी है। उनका दोटूक कहना है कि उनके भविष्य के साथ जिस तरह का खिलवाड़ किया जा रहा है, उसके बाद उनके पास जान देने के अलावा कोई और चारा नहीं बचा है। अभ्यर्थियों ने सरकार को साफ चेतावनी दी है कि अगर अब भी उनकी बात नहीं सुनी गई और उनका छीना हुआ हक वापस नहीं मिला, तो वे पीछे नहीं हटेंगे।

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