Video! : "नौकरी भी गई और भविष्य भी संकट में...", JSSC CGL रद्द होने के फैसले से मचा बवाल, अब प्रोजेक्ट भवन के बाहर हंगामा
JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने के फैसले के बाद नौकरी पा चुके करीब 2,000 कर्मचारियों ने रांची के प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सेवा सुरक्षा और व्यक्तिगत जांच की मांग उठाई।

JSSC-CGL: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा JSSC-CGL परीक्षा रद्द किए जाने की घोषणा के बाद झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में एक नया तूफान खड़ा हो गया है। एक तरफ जहां आंदोलनकारी छात्र इस फैसले का जश्न मना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इसी परीक्षा के जरिए नौकरी पा चुके करीब 2,000 कर्मचारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई है। अपने भविष्य और नौकरी पर मंडराते काले बादलों को देख इन कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने सोमवार शाम राजधानी रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन (सचिवालय) के बाहर जुटकर जोरदार हंगामा और प्रदर्शन किया।
'जांच से डर नहीं, पर निर्दोषों की बलि क्यों?'
सचिवालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे सहायक प्रशाखा अधिकारियों (ASO) ने प्रोजेक्ट भवन के बाहर शांतिपूर्ण मानव श्रृंखला बनाकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। हंगामा कर रहे कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि वे अपने-अपने पदों पर पूरी निष्ठा और ईमानदारी से काम कर रहे हैं और किसी भी तरह की इंडिविजुअल (व्यक्तिगत) जांच का सामना करने को तैयार हैं। उनका कहना है कि अगर भर्ती प्रक्रिया में कहीं कोई धांधली या गड़बड़ी हुई है, तो पुलिस और सरकार को सिर्फ दोषियों को चिन्हित कर उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। पूरी परीक्षा को ही सामूहिक रूप से रद्द कर देना उन हजारों निर्दोष अभ्यर्थियों के साथ घोर अन्याय है, जिन्होंने सालों की हाड़-तोड़ मेहनत और अपनी योग्यता के दम पर यह मुकाम हासिल किया है।
सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी कानूनी लड़ाई, अब फिर भविष्य अधर में
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने अपने लंबे संघर्ष का दर्द बयां करते हुए बताया कि JSSC CGL की परीक्षा और नियुक्ति पाने के लिए उन्हें पहले भी एक बहुत लंबा रास्ता तय करना पड़ा था। कई अभ्यर्थियों ने तो यहां तक दावा किया कि उन्होंने इस मामले में लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और सुप्रीम कोर्ट तक में केस जीतने के बाद ही उन्हें यह सरकारी नौकरी नसीब हुई थी। अब अचानक पूरी परीक्षा रद्द होने के फरमान से उनके सामने यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि अगर उनकी नौकरी चली जाती है, तो उनके और उनके पूरे परिवार के भविष्य का क्या होगा।
सरकार के सामने धर्मसंकट: एक तरफ आंदोलनकारी, दूसरी तरफ 2,000 परिवार
देर शाम हुए इस घटनाक्रम के बाद इन अधिकारियों ने सरकार से अपनी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने की गुहार लगाई है। इनका मानना है कि अगर इस तरह पूरी भर्ती निरस्त कर दी जाती है, तो इससे राज्य का प्रशासनिक कामकाज भी बुरी तरह प्रभावित होगा। अब सरकार के सामने एक तरफ सड़कों पर उतरे आंदोलनकारी छात्रों की परीक्षा रद्द करने की मांग है, तो दूसरी तरफ वर्तमान में सेवा दे रहे 2,000 कर्मचारियों और उनके परिवारों के भविष्य को बचाने का भारी दबाव है। ऐसे में पूरे झारखंड की नजरें अब हेमंत सोरेन सरकार पर टिकी हैं कि वह इस बड़े धर्मसंकट के बीच क्या बीच का रास्ता निकालती है।
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