कोडरमा में शिक्षकों की मांग को लेकर कस्तूरबा की छात्राओं का हंगामा, पैदल ब्लॉक पहुंचीं कई बच्चियां हुईं बेहोश
कोडरमा के पोखरडीहा स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में शिक्षकों की कमी और बदहाल पढ़ाई व्यवस्था से तंग आकर छात्राओं का सब्र आखिरकार शुक्रवार को जवाब दे गया।

Koderma: कोडरमा के पोखरडीहा स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में शिक्षकों की कमी और बदहाल पढ़ाई व्यवस्था से तंग आकर छात्राओं का सब्र आखिरकार शुक्रवार को जवाब दे गया। शिक्षक बहाल करने और वार्डन की मनमानी रोकने की मांग को लेकर दर्जनों छात्राएं पैदल चलकर प्रखंड मुख्यालय पहुंच गईं। छात्राओं ने प्रभारी BDO सह CO मनोज कुमार रवि के दफ्तर का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसी दौरान तेज धूप, लंबी दूरी पैदल चलने और मानसिक तनाव की वजह से कई छात्राओं की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी और वे एक-एक कर बेहोश होकर जमीन पर गिरने लगीं। छात्राओं के अचेत होते ही ब्लॉक परिसर में भारी अफरा-तफरी मच गई और अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए।
अस्पताल में कराया गया भर्ती, मची रही अफरा-तफरी
छात्राओं के अचानक जमीन पर गिरने के बाद मौके पर मौजूद प्रशासनिक कर्मियों और स्थानीय लोगों ने तुरंत मोर्चा संभाला। बीमार और अचेत छात्राओं को आनन-फानन में वाहनों से नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाया गया। वहां डॉक्टरों की विशेष टीम ने उनका प्राथमिक इलाज शुरू किया। समय पर मिले उपचार के बाद बच्चियों की हालत में धीरे-धीरे सुधार आया, लेकिन इस पूरी घटना के बाद से छात्राओं और अभिभावकों के बीच गहरा आक्रोश फैला हुआ है।
स्वतंत्रता दिवस पर भी की थी शिकायत, नहीं निकला हल
छात्राओं का कहना है कि उन्होंने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम के दौरान ही प्रभारी BDO सह CO मनोज कुमार रवि, स्थानीय थाना प्रभारी और जिला परिषद सदस्य प्रतिनिधि के सामने अपनी पीड़ा बयां की थी। उस समय छात्राओं ने रोते हुए विद्यालय की वार्डन प्रतीक्षा मिंज और शिक्षकों के व्यवहार की पोल खोली थी। अधिकारियों ने उस वक्त दो दिन के भीतर बैठक बुलाकर पूरे मामले को सुलझाने का ठोस भरोसा दिया था। एक सप्ताह का समय बीत जाने के बाद भी जब प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया, तो छात्राओं को मजबूर होकर सड़कों पर उतरना पड़ा।
छात्राओं ने लगाए मनमानी और प्रताड़ना के गंभीर आरोप
छात्राओं ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि वार्षिक परीक्षाएं सिर पर हैं, लेकिन स्कूल में शिक्षक न होने के चलते सिलेबस आधा भी पूरा नहीं हो पाया है। जब भी वे पढ़ाई को लेकर सवाल पूछती हैं या आवाज उठाती हैं, तो उन्हें कथित तौर पर यह कहकर चुप करा दिया जाता है कि ज्यादा पढ़-लिखकर इंजीनियर नहीं बनना है। छात्राओं ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि विरोध करने पर उन्हें स्कूल से ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) काटकर बाहर निकालने की सीधी धमकी दी जाती है। छात्राओं ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और वार्डन समेत लापरवाह कर्मियों पर सख्त कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है।

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