यूके ने दिखाया भारत पर भरोसा: रक्षा, व्यापार और प्रशिक्षण में विस्तार
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर भारत दौरे पर 125 कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ पहुंचे. दौरे में रक्षा सहयोग, वायुसेना प्रशिक्षण, आर्थिक समझौतों और व्यापारिक विस्तार पर सहमति बनी. यूके ने भारतीय आईटी टैलेंट को आकर्षित करने की मंशा जताई और रूस-भारत तेल डील पर कोई नकारात्मक टिप्पणी नहीं की.

नई दिल्ली : यूके प्रधानमंत्री कीर स्टारमर भारत दौरे पर एक बड़े डेलिगेशन के साथ आए हैं, जिसमें लगभग 125 महत्वपूर्ण कंपनियों के सीईओ, उद्यमी, विश्वविद्यालयों के वाइस-चांसलर और अन्य वरिष्ठ पदधारी शामिल हैं. इस दौरे का मकसद भारत के साथ रक्षा, आर्थिक और व्यापारिक साझेदारियों को नई ऊँचाइयों पर ले जाना है.
वायुसेना प्रशिक्षण और रक्षा सहयोग
भारत और यूके ने रक्षा क्षेत्र में नए कदम उठाए हैं. एक महत्वपूर्ण घोषणा के अनुसार, भारतीय वायुसेना (IAF) के फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स यूके की रॉयल एयर फोर्स (RAF) को प्रशिक्षित करेंगे. यह विश्वास का इजहार है कि दोनों राष्ट्र सुरक्षा और तकनीकी क्षेत्र में घनिष्ट साझेदारी चाहते हैं.
साथ ही, यूके ने हल्के मल्टीरोल मिसाइलों की आपूर्ति के लिए भारत के साथ एक £350 मिलियन (लगभग $468 मिलियन) का करार किया है. यह सौदा रक्षा मामलों में दोनों देशों के बीच विश्वास व साझेदारी को और मजबूत करेगा.
आर्थिक समझौते और व्यापार वृद्धि का लक्ष्य
यह दौरा दो राष्ट्रों के बीच आर्थिक रीढ़ को और मज़बूत करने की दिशा में है. जुलाई 2025 में हस्ताक्षरित भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) इस संबंध का मुख्य आधार है, जिसमें टैरिफ में कटौती, बाजारों तक पहुंच की सुविधा और व्यापारिक बाधाओं को कम करने का वादा शामिल है.
प्रधानमंत्री मोदी ने यह कहा है कि दोनों देशों का लक्ष्य 112 अरब डॉलर से ज़्यादा द्विपक्षीय व्यापार आंकड़ों को 2030 से पहले पार करना है. यह लक्ष्य व्यापार, निवेश और सेवाओं के ज़रिए हासिल होगा.
अमेरिका की गलती दोहराएगा नहीं यूके — भारतीय प्रतिभा को करेगा आकर्षित
ब्रिटेन ने यह स्पष्ट किया है कि वह भारतीय IT टैलेंट्स को आकर्षित करने में अमेरिका जैसी गलत नीतियों को नहीं दोहराएगा. इस प्वाइंट से यह संकेत मिलता है कि यूके भारतीय टेक स्टार्टअप्स, इंजीनियर्स व अन्य स्किल्ड वर्कफोर्स से सीधा जुड़ना चाहता है, ताकि दोनों देशों को लाभ हो.
प्रशिक्षण, शिक्षा, और सांस्कृतिक साझेदारी
इस यात्रा का एक भाग शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना है. दोनों देश छात्रों एवं शिक्षाविदों के बीच आदान-प्रदान व शोध साझेदारियों को बढ़ाना चाहते हैं. इससे नई तकनीक, नवाचार और ज्ञान उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा.
क्या कहा भारत-रूस Oil Deal पर?
यूके ने किसी तरह की नकारात्मक टिप्पणी नहीं की है भारत-रूस की पेट्रोलियम (oil/petroleum) डील को लेकर. यह स्पष्ट है कि यूके इस तरह के सौदों को लेकर सम्मानजनक दूरी बनाए रखना चाहता है, ताकि द्विपक्षीय संबंधों में व्यापार व रक्षा सहयोग पर ध्यान केंद्रित हो सके.
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