उज्जैन जमीन विवाद: मोहन यादव के परिवार की जमीन खरीद पर उठा सवाल, सरकार ने आरोपों को किया खारिज
उज्जैन में जमीन खरीद को लेकर सामने आई रिपोर्ट के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष जांच की मांग कर रहा है, जबकि सरकार ने आरोपों को तथ्यहीन बताया है।

भोपाल/उज्जैन: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार से जुड़ी जमीन खरीद को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट में दावा किया गया कि मुख्यमंत्री के परिवार और उनसे जुड़े कारोबारी समूहों ने पिछले कुछ समय में उज्जैन के अलग-अलग इलाकों में बड़ी मात्रा में जमीन खरीदी है।
रिपोर्ट में कहा गया कि जमीन खरीद ऐसे क्षेत्रों में हुई जहां सड़क परियोजनाओं, नए विकास कार्यों और भविष्य में भूमि उपयोग में बदलाव की संभावना बताई जा रही है। इसी वजह से इस मामले में हितों के टकराव (Conflict of Interest) को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
बताया गया कि परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों ने कई प्लॉट खरीदे और इनमें कुछ हिस्से विकास परियोजनाओं के आसपास स्थित बताए गए। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा और पारदर्शिता की मांग की।
हालांकि मुख्यमंत्री कार्यालय ने इन आरोपों को खारिज किया है। सरकार की ओर से कहा गया कि मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत जमीन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है और परिवार के कई जमीन सौदे मुख्यमंत्री बनने से पहले के हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि रिश्तेदारों के निजी कारोबार को सीधे मुख्यमंत्री से जोड़ना सही नहीं है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित जमीनों का रिकॉर्ड पहले से सार्वजनिक दस्तावेजों में दर्ज है और सभी लेनदेन नियमों के अनुसार किए गए हैं।
इस बीच विपक्षी नेताओं ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह मुद्दा अब राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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