Jharkhand (Giridih): गिरिडीह में भारत सरकार के महत्वपूर्ण शोध संस्थान भारतीय सांख्यिकीय संस्थान (आईएसआई) में दो दिवसीय सेमिनार सह कार्यशाला का आयोजन किया गया. गिरिडीह आईएसआई के प्रोफसर डॉक्टर हरिचरन बहरा के नेतृत्व में इस दो दिवसीय कार्यशाला में देश के कई बड़े शिक्षण संस्थान के प्रोफेसर, शोधकर्ता और स्कॉलर्स शामिल हुए.
कार्यशाला की शुरुआत सदर एसडीएम श्रीकांत यशवंत के साथ हैदराबाद केंद्रीय विवि के प्रोफेसर डॉक्टर पी वेंकटराव ने दीप जलाकर किया. वहीं कार्यशाला के दौरान स्कॉलर को कई वक्ताओं द्वारा ग्रामीण उद्यमिता से जुड़ी जानकारी दी गई. जबकि मीडिया से बातचीत के दौरान इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विवि के प्रोफेसर डॉक्टर एमटीभी नागराजू ने कहा कि अगर सही से फोकस किया जाए, तो झारखंड समेत कई राज्यों के ग्रामीण जनजातीय समुदाय से जुड़े लोगों को सबसे पहले बाजार से जोड़ने की जरूरत है. जिससे उनके उत्पादन को उचित मूल्य मिल सके.
जनजातीय वर्ग दातून और पत्तल के छोटे कारोबार से जुड़ा हुआ है, जिन्हें बाजार से अब तक जोड़ा नहीं गया. इस कार्यशाला में चर्चा के बाद उसकी रिपोर्ट भारत सरकार के आदिम जनजातीय मंत्रलाय को सौपी जाएगी. वहीं दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के डॉक्टर अनिल कुमार ने कहा कि देश के ग्रामीण इलाकों में कारीगरों की कोई कमी नहीं है, ख़ास तौर पर जनजाति समुदाय वर्ग खुद में बड़े कारीगर हैं. लेकिन इन्हें कारीगरी के उत्पादन का बाजार नही दिया गया, और सरकार को इस पर फोकस करना होगा. ग्रामीण उद्दमीता से जोड़ने पर जनजाति वर्ग का विकास तेजी से होगा.
जबकि ओड़िशा आईटीआई के सीनियर प्रोफेसर नरेश साहू ने कहा कि ग्रामीण इलाका देश के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण है. ग्रामीणों को उद्देमिता कि जानकारी देना जरुरी है. उनके उत्पाद को सरकार और सरकार के जरिये बाजार तक पहुंचे, यह रास्ता खोजना होगा. सिर्फ इनके लिए योजना बनाने से कुछ हासिल होने वाला. क्योंकि ग्रामीण ऐसे है, वो किसी भी जाति वर्ग के हो, वो खुद को कारीगरी से दूर नहीं रख सकते. ये उनके सांस्कृतिक जीवन का हिस्सा है. ऐसे में सरकार सरल रास्ता तलाशें, और उनके उत्पाद को बाजार उपलब्ध कराएं.
इधर दो दिवसीय कार्यशाला में देश के कई बड़े विवि और शिक्षण संस्थान के प्रोफेसर और स्कॉलर शामिल हुए.
Reporter: Manoj Kumar Pintu








