Ramzan 2026: आज रमजान महीने की 20वीं तारीख है आज के ही दिन फतह मक्का की घटना हुई थी. फतह मक्का यानि मक्का पर विजय. ये 8वीं हिजरी की 20 रमज़ान की घटना है. मक्का शरीफ, जहां पैगंबर मुहम्मद का लालन पालन हुआ और वहीं अपने जीवन के चालीसवें वर्ष में हीरा नामक गुफा में उन्हें इलहाम हुआ यानि अल्लाह ने उन्हें पैगंबर के रूप में चुना, ये बात उन्होंने मक्का वालों को बताई, जो उनके अपने ही कबीले यानि कुरैश और खानदान के लोग थे. लेकिन कुरैशियों ने उनकी बात का मजाक उड़ाया और उन्हें नबी मानने से इनकार कर दिया. लगभग तेरह साल के बाद उन्होंने मक्का से मदीना के लिए हिजरत की यानि मक्का छोड़कर मदीना चले गए.

मदीना में उन्हें लोगों ने सर माथे पर बिठाया और उनकी ताकत बढ़ती गयी. ये ताकत इतनी बढ़ी कि जब अपने 1400 सहाबियों (अनुयायियों) के साथ जब वे उमरा (छोटी हज) के लिए मक्का जा रहे थे, तो कुरैशियों ने उन्हें उमरा करने से रोक दिया और उनके साथ हुदैबिया नामक जगह पर एक सुलह (सन्धि) की, जो सुलह हुदैबिया के नाम से मशहूर है. इस सुलह में कई शर्तें शामिल थीं, जैसे कि मुसलमान और कुरैश 10 साल तक एक दूसरे के खिलाफ कोई जंग नहीं लड़ेंगे और जो बाकी के कबीले हैं वे दोनों में से किसी एक को चुनने के लिए आज़ाद हैं.
इसके तहत बनू बक्र नामक कबीले ने कुरैश के साथ जाने का फैसला किया और एक दूसरे कबीले बनू खुजाबा ने मुसलमानों को चुना. लेकिन एक दिन बनू बक्र ने कुरैशियों की मदद से बनु खुजाबा पर हमला कर दिया. मुसलमानों ने इसे सुलह हुदैबिया का उल्लंघन बताया. कुरैशियों के सरदार अबू सूफियान ने मदीना आकर अपनी सफाई दी कि इस लड़ाई में मक्का के कुरैशियों का कोई हाथ नहीं है लेकिन वो नाकाम रहा और निराश होकर लौट गया.
इसके बाद मुसलमानों की 10,000 की सेना ने मक्का के लिए कूच किया. करीब एक हफ्ते के बाद यानि 18 रमजान को मुसलमान मक्का की सीमा पर प्रवेश कर गए और अपना डेरा जमा लिया. मक्कावासियों के लिए ये बहुत बड़ी सेना थी और उन्होंने कभी इतनी बड़ी सेना नहीं देखी थी. मक्का के कुरैशियों का सरदार अबू सूफियान इसका जायजा लेने गया लेकिन वह पकड़ा गया फिर उसने इस्लाम कुबूल कर लिया.
अबू सूफियान को छोड़ दिया गया और उसके माध्यम से मक्कावासियों को ये संदेश भिजवाया गया कि जो लोग अबू सूफियान के घर में पनाह लेंगे, जो मस्जिद उल हराम (काबा) में पनाह लेंगे, जो अपने हथियार डाल देंगे और जो अपने घरों के दरवाजे बंद कर लेंगे वे सुरक्षित रहेंगे. मुस्लिम सेना पहले हमला नहीं करेगी जब तक उस पर कोई हमला ना हो. 20 रमजान को जैसे ही सुबह हुई पैगंबर मोहम्मद ने अपने सहाबियों के साथ मक्का में प्रवेश किया. यहां पर काबे के एक दरवाज़े पर सफ़वान से छोटी सी लड़ाई हुई और कुछेक कुरैशी मारे गए.
इसके बाद काबा शरीफ परिसर के 360 बुतों (मूर्तियां) को नष्ट कर दिया गया, जिसमें अल लात, अल मनात और अल उज्जा (तीन प्रमुख देवियां) के बुत थे. इसके अलावा काबा परिसर में रखे अन्य बुतों को भी नष्ट कर दिया गया. इसी समय कुरान की सूरा 17 अल इस्रा की आयत 81 नाजिल हुई (उतरी) जिसमें अल्लाह ताला फरमाते हैं
(ऐ रसूल) कह दो कि (दीन) हक़ आ गया और बातिल नेस्तनाबूद हुआ, इसमें शक नहीं कि बातिल मिटने वाला ही था.
सहीह बुख़ारीः4720 और सहीह मुस्लिमः1781 में भी इसका जिक्र किया गया है. फ़तह मक्का के बाद अरब के कई कबीलों ने बड़ी संख्या में इस्लाम कबूल किया और महज दो सालों के अंदर पूरे अरब में इस्लाम का कब्ज़ा हो गया.








