हजारों लोगों का काफिला सड़कों पर, आदिवासी कर रहे कुर्मी आंदोलन का विरोध
कुर्मी आंदोलन के विरोध प्रदर्शन के रूप में राजधानी रांची में आक्रोशित आदिवासियों के द्वारा रैली निकाली गई. झारखंड के पारंपरिक वेशभूषा पहने बड़ी संख्या में उक्त रैली में महिलाओं ने भी हिस्सा लिया. रैली की अगुआई केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की कर रहे थे.

रांची : रविवार 12 अक्टूबर को कुर्मी आंदोलन के विरोध प्रदर्शन के रूप में राजधानी रांची में आक्रोशित आदिवासियों के द्वारा रैली निकाली गई. झारखंड के पारंपरिक वेशभूषा पहने बड़ी संख्या में उक्त रैली में पुरुषों सहित महिलाओं ने भी हिस्सा लिया. रैली की अगुआई केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की कर रहे थे. रैली का आरंभिक केंद्र मोराबादी मैदान है.
कुर्मी समुदाय की मांग क्या है, जिसका आदिवासी कर रहे हैं विरोध?
कुर्मी आंदोलन की मुख्य मांगें कुर्मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची में शामिल करना और कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करना हैं. उनका दावा है कि 1950 से पहले उन्हें जनजाति की श्रेणी में रखा गया था, लेकिन बाद में हटा दिया गया.
आदिवासियों के विरोध का कारण
कुर्मी आंदोलन के खिलाफ आदिवासियों के विरोध का मुख्य कारण यह डर है कि कुर्मियों को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने से उनके अपने संवैधानिक अधिकार, आरक्षण, नौकरी और जमीन पर खतरा पैदा होगा. आदिवासी नेताओं का तर्क है कि कुर्मियों की अलग सांस्कृतिक परंपराएं हैं और उन्हें आदिवासी का दर्जा देना आदिवासियों के अधिकारों पर हमला है.
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