पैर टूटने पर गत्ता बांध रहे हैं, OT में जाने क्या जुगाड़ होगा? अस्पताल का यह हाल, कर रहा खड़े सवाल
एक वायरल VIDEO ने बेगूसराय के अस्पताल की व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है। सड़क हादसे में घायल युवक के इलाज का दावा अब जांच के दायरे में है।


सोशल मीडिया पर कभी-कभी ऐसा वीडियो सामने आ जाता है जिसे देख कर लो हैरान ही नहीं, बल्कि सिस्टम की हालत देखकर परेशान भी हो जाते हैं। इस बार चर्चा में है बेगूसराय का मंझोला अनुमंडलीय अस्पताल, जहां सड़क हादसे में घायल एक युवक के टूटे पैर पर प्लास्टर की जगह कार्टून का सहारा दिया गया। वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल की तैयारी और स्वास्थ्य विभाग के इलाज के तरीकों पर सवाल उठने लगे।
सड़क हादसा, अस्पताल पहुंचे और फिर जो दिखा
वायरल वीडियो 25 जुलाई 2026 का बताया जा रहा है। अस्पताल की पर्ची के अनुसार घायल युवक नाव कोठी प्रखंड के महेशवाड़ा वार्ड- 4 का निवासी है। उनका नाम कृष्ण कुमार, उम्र 20 वर्ष, और वह ग्रेजुएशन के छात्र हैं। मिली जानकारी के अनुसार कृष्ण कुमार अपने भाई के साथ बाइक से जा रहे थे इसी दौरान उनका एक सड़क हादसा हुआ। इसी हादसे में एक ऑटो के चपेट में आने की वजह से उनके दाहिने पैर की जांघ की हड्डी टूट गई। हड्डी टूटने के बाद जब परिजन उसे लेकर इलाज के लिए अनुमंडल या अस्पताल पहुंचे तब युवक के फ्रैक्चर वाले पर पर प्लास्टर या मेडिकल स्प्लिंट लगाने की जगह गत्ते का अस्थाई सहारा बांध दिया गया। इसके बाद बेहतर इलाज के लिए बेगूसराय के सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया।
CM ने किया था उद्घाटन, अब स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
गौरतलब है कि मंझोला अनुमंडलीय अस्पताल को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ विकसित किया गया था और इसका उद्घाटन खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी प्रगति यात्रा के दौरान किया था। ऐसे में लोग सवाल कर रहे हैं कि यदि फ्रैक्चर जैसे मामलों में प्राथमिक उपचार के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं थे तो मरीजों को आखिर किस भरोसे इलाज मिलेगा? वीडियो सामने आने के बाद मामला स्वास्थ्य विभाग के संज्ञान में पहुंचा। सिविल सर्जन डॉ अशोक कुमार ने बताया कि वायरल वीडियो की जांच कराई जा रही है। उन्होंने आगे कहा कि यदि जांच में किसी स्वास्थ्य कर्मी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि युवक को कार्टून का सहारा क्यों लगाया गया क्या यह आपातकालीन प्राथमिक उपचार का हिस्सा था या मात्र लापरवाही और संसाधन की कमी?

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