Ranchi News: झारखंड में धान खरीद की धीमी रफ्तार ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. सरकारी इंतज़ार इतना लंबा हो गया है कि किसान मजबूरी में अपना धान औने-पौने दाम पर बाजार में बेचने को मजबूर हैं. खरीद केंद्रों की सुस्ती, बिचौलियों की सक्रियता और सिस्टम की देरी तीनों का खामियाजा किसान भुगत रहा है. अब यह संकट सिर्फ दाम का नहीं, बल्कि भरोसे का बन चुका है. दरअसल, आपको बता दें, राज्य सरकार ने इस सीजन में 60 लाख क्विंटल धान खरीद का लक्ष्य तय किया था, लेकिन अब तक महज़ 19.8 लाख क्विंटल की ही खरीद हो पाई है. यानी 2.79 लाख पंजीकृत किसानों में से केवल 35,547 किसान ही सरकारी केंद्रों तक धान पहुंचा सके हैं.
बाबूलाल ने सरकार पर लगाए बिचौलियों को संरक्षण देने का आरोप
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इन आंकड़ों को किसानों के साथ अन्याय बताते हुए सरकार पर बिचौलियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि चुनाव के दौरान 3200 रुपये प्रति क्विंटल का वादा किया गया था, लेकिन आज सरकारी खरीद करीब 2450 रुपये में सिमट कर रह गई है. 2025-26 में राज्य सरकार ने 60 लाख क्विंटल धान की खरीद का लक्ष्य रखा था. 3 फरवरी 2026 तक सरकार ने 19 लाख 80 हजार 2 सौ 16 क्विंटल ही धान खरीदी है. 2 लाख 79 हजार किसानों ने धान बिक्री के लिए पंजीकृत किया है लेकिन इनमें से 35 हजार 7 सौ 47 किसानों से धान खरीदी गई है.
निजी व्यापारियों के पास जाने को किसान मजबूर
वहीं, दूसरी ओर, किसान अपनी मजबूरी साफ़ तौर पर बयां कर रहे हैं किसानों का कहना है कि खरीद केंद्रों की जटिल और धीमी प्रक्रिया ने उन्हें निजी व्यापारियों के पास जाने को मजबूर कर दिया. भंडारण की सुविधा नहीं, कर्ज की किस्तें, मजदूरी और खाद-बीज के खर्च इन सबके दबाव में कई किसानों ने 1200 से 1700 रुपये प्रति क्विंटल में ही धान बेच दिया है. 
विपक्ष के आरोपों को कृषि मंत्री ने सिरे से किया खारिज
धान खरीद में माफिया के आरोपों पर सियासत भी तेज हो गई है. इस संबंध में इधर सूबे के कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज किया और कहा कि सरकार किसानों के हितों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि यदि विपक्ष किसानों के हित में ठोस और सकारात्मक सुझाव देगा, तो सरकार उनपर गंभीरता से विचार करेगी.
किसानों के हित में काम कर रही मौजूदा सरकार- कांग्रेस
वहीं, सत्तारूढ़ कांग्रेस ने भी विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज किया. पार्टी के महासचिव राकेश सिन्हा ने कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के बयान का समर्थन करते हुए कहा है कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर ही धान की खरीद कर रही है और विपक्ष जानबूझकर आंकड़ों के जरिए भ्रम फैला रहा है. कांग्रेस ने बीजेपी के बयानों का पलटकर सवाल करते हुए कहा कि जब पूर्ववर्ती सरकार सत्ता में थीं, तब भंडारण व्यवस्था और खरीद प्रक्रिया को मजबूत क्यों नहीं किया गया. राकेश सिन्हा ने कहा कि मौजूदा सरकार किसानों के हित में लगातार काम कर रही है और किसी भी तरह की गड़बड़ी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.
हालांकि आपको बता दें, धान खरीद का यह मुद्दा अब केवल खेती तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह सरकारी नीति, प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक भरोसे की असली परीक्षा बन चुकी हैं सवाल सीधा है क्या किसान को समय पर सही दाम और भरोसा मिल पाएगा, या फिर यह इंतज़ार और लंबा खिंचता जाएगा.
रिपोर्ट- यशवंत कुमार








