PESA नियमावली की आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी, 13 अनुसूचित जिलों में पूर्ण रूप से होगा लागू, जानें क्या हैं प्रावधान!
झारखंड सरकार की वर्तमान कैबिनेट द्वारा पेसा एक्ट को मंजूर कर देने के पश्चात अब इसकी नियमावली भी आधिकारिक रूप से जारी कर दी गई है. नियमावली के अनुसार ग्रामीणों को अपने संसाधनों के संरक्षण से संबंधित विशेष अधिकार दिए गए हैं. साथ ही छोटे मामलों का निपटारा ग्राम सभा अपने स्तर पर ही कर सकेगी.

JHARKHAND (RANCHI): पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996 यानी PESA Act को हेमंत कैबिनेट द्वारा बीते दिनों मंजूरी मिल चुकी थी. आज, 2 जनवरी को ऑफिशियल नॉटिफिकेशन जारी कर दी गई है. बता दें कि पेसा नियमावली के तहत अनुसूचित क्षेत्रों (आदिवासी बहुल इलाकों) में रहने वाले लोगों को अपने गांव, जमीन, जंगल और संसाधनों से संबंधित वास्तविक अधिकार प्राप्त होते हैं.

ग्राम सभा को सशक्त बनाने पर जोर
नियमावली में सबसे अधिक जोर ग्राम सभा को सशक्त बनाने पर दिया गया है. इसमें साफ कहा गया है कि ग्राम सभा ही गांव की सर्वोच्च संस्था होगी और बिना उसकी सहमति के गांव से जुड़े किसी भी बड़े फैसले को लागू नहीं किया जा सकेगा. चाहे वह भूमि अधिग्रहण, खनन, उद्योग स्थापना, या विकास परियोजना हो, हर मामले में ग्राम सभा से अनुमति की विशेष आवश्यकता पड़ेगी.

बाहरी हस्तक्षेप होंगे सीमित
इसमें उल्लेख है कि जल, जंगल और जमीन से जुड़े संसाधनों पर ग्राम सभा का अधिकार माना गया है. विशेष रूप से लघु वन उपज (Minor Forest Produce), गांव के हाट-बाजार, पारंपरिक संसाधन और स्थानीय जल स्रोतों के संरक्षण व प्रबंधन का अधिकार ग्राम सभा तक निहित है. इससे बाहरी हस्तक्षेप को सीमित करने और स्थानीय लोगों की आजीविका को सुरक्षित करने की मंशा स्पष्ट होती है.
ग्राम सभा की सहमति के बगैर नहीं होंगे ये कार्य
नियमों में यह भी कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति या समुदाय की जमीन यदि किसी परियोजना के लिए ली जाती है, तो पुनर्वास और मुआवज़े से जुड़ी शर्तों पर ग्राम सभा की सहमति जरूरी होगी. साथ ही, विस्थापन की स्थिति में पहले विकल्प खोजने और अंतिम उपाय के रूप में ही जमीन लेने की बात कही गई है.
ग्रामीण स्तर पर होगा विवादों का निपटारा
इसके अलावा, यह नियमावली परंपरागत कानूनों, रीति-रिवाजों और सामाजिक व्यवस्था को मान्यता देती है. ग्रामीण स्तर पर विवादों के निपटारे में स्थानीय परंपराओं को प्राथमिकता देने की व्यवस्था की गई है. इससे छोटे-मोटे मामलों के निपटारे के लिए जनता को अदालतों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे.
स्वशासन को मिलेगी मजबूती
कुल मिलाकर, PESA नियमावली 2025 का उद्देश्य आदिवासी क्षेत्रों में स्वशासन (Self-Governance) को मजबूत करना, प्रशासनिक फैसलों में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाना और विकास के नाम पर होने वाले शोषण को रोकना है. यह नियमावली ग्राम सभा को केवल सलाहकार नहीं, बल्कि निर्णायक भूमिका की स्थापना करती है.
specializes in local and regional stories, bringing simple, factual, and timely updates to readers.
Related Posts

झारखंड कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक 15 अप्रैल को, प्रोजेक्ट भवन में जुटेंगे दिग्गज

बुलडोजर कार्रवाई में निर्माणाधीन मकान जमींदोज, भू-माफियाओं के अवैध कब्जे से गिरिडीह वन विभाग ने दिलाई मुक्ति







