झारखंड में नई उत्पाद नीति के जरिए निजी हाथों में शराब दुकान दी गई है । टेंडर प्रक्रिया पूरी करते हुए राज्य में करीब 1300 दुकानों का जिम्मा निजी हाथों को दिया गया था । अब इस टेंडर के एक साल पूरे होने वाले है । विभाग इस बार नए टेंडर में कई संशोधन भी कर सकता है । अब तक खाद्य सुरक्षा एवं मानक एल्कोहोलिक बेवरेजेस रेगुलेशन 2018 का पालन राज्य में नहीं हो रहा है । झारखंड में शराब दुकान नहीं लेते है लाइसेंस देश के कई राज्य है जहां शराब दुकान चलाने के लिए भी FSSAI से लाइसेंस बनवाना होता है लेकिन झारखंड में यह नियम नहीं लाया गया है । आए दिन मिलावटी या नकली शराब की खेप पकड़ी जाती है लेकिन उसके कारण या निवारण पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है । झारखंड में सिर्फ बार, रेस्टोरेंट या सेंसेक्स को ही फूड लाइसेंस अनिवार्य है । दुकान जो निजी हाथों द्वारा संचालित है उनके लिए फूड लाइसेंस अनिवार्य नहीं है । खाने की श्रेणी में ही आता है शराब सुरक्षा और मानक अधिनियम (FSSA), 2006 की धारा 3(1)(j) के तहत 'खाना' या 'खाद्य पदार्थ' (Food) की परिभाषा के अनुसार कोई भी पदार्थ चाहे वह पूरी तरह से तैयार (processed) हो, आधा तैयार (partially processed) हो या कच्चा (unprocessed) हो , जिसे मानव उपभोग के लिए बनाया गया है वह 'खाना' कहलाता है । इसमें पीने का पानी और शराब भी शामिल हैं । लेकिन अब तक नहीं गया इस पर ध्यान। एल्कोहलिक बेवरेज के लिए भी है नियम 2018 ने एक नियम लागू हुआ था जिसमें एल्कोहोलिक बोतल के लेबल पर भी यह जानकारी देना अनिवार्य होगा कि उसमें फूड उत्पाद है या नहीं। खाद्य सुरक्षा एवं मानक एल्कोहोलिक बेवरेजेस रेगुलेशन 2018 के तहत वाइन, रम, वोदका, बियर जैसे सभी एल्कोहोलिक पेय पदार्थों के लिए लाइसेंस होना आवश्यक है। यह नियम एल्कोहोलिक पेय पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए लागू किया गया है। कई राज्यों में लागू कर दिया गया है नियम 2022 में उत्तर प्रदेश ने यह नियम लागू किया गया था कि शराब की दुकान के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन से भी लेना होगा लाइसेंस । झारखंड में भी अब जल्द ही नए टेंडर निकले जाएंगे जो कि शराब दुकानों के लिए होंगे । अब ऐसे में यह संभावना है कि खाद्य सुरक्षा विभाग इस निमित एक पत्र उत्पाद विभाग को भेज सकता है ताकि खाद्य सुरक्षा एवं मानक एल्कोहोलिक बेवरेजेस रेगुलेशन 2018 का पालन हो सके ।






