Stalin के सामने भारी पड़ा थलापति का 'विजय घोष', सनातन विरोधी टिप्पणियों ने डाला चुनाव पर गहरा असर
तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव में जोसेफ विजय चंद्रशेखर ने AIDMK को पीछे छोड़ दिया है. थलापति विजय की जीत और स्टालिन के पटखनी के पीछे के कारणों को समझने का प्रयास करते हैं.

Tamilnadu Election Result: थलापति विजय की हीरो से मुख्यमंत्री तक की कहानी तमिलनाडु की राजनीति में एक अहम बदलाव का संकेत दे रही है. सोमवार को आए विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद विजय की तमिझगा वेत्री कड़गम (TVK) एक बड़ी पार्टी बनकर उभरी है.
सिनेमाई करियर और 'थलापति' की उपाधि
विजय ने 1992 में 18 साल की उम्र में अपने पिता एस. ए. चंद्रशेखर द्वारा निर्देशित फिल्म नालय्या थीरपु से बतौर मुख्य अभिनेता शुरुआत की थी. संघर्ष के बाद उन्होंने पूवे उनक्कागा (1996) और घिल्ली (2004) जैसी हिट फिल्मों से सुपरस्टार का दर्जा हासिल किया. उनके फैंस उन्हें प्यार से 'थलापति' कहते हैं, जिसका अर्थ होता है कमांडर. आइए समझते हैं कि 2024 में महज दो साल पहले ही पार्टी लॉन्च किए विजय ने ऐसा क्या किया कि आज उन्होंने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है और सीएम बनने जा रहे हैं.
युवा और 'Gen Z' मतदाताओं का समर्थन
विजय की सबसे बड़ी ताकत राज्य के युवा मतदाता रहे हैं. तमिलनाडु के कुल मतदाताओं में लगभग 21% युवा (18-39 वर्ष) हैं. विजय के सिनेमाई 'क्रेज' और उनकी नई सोच ने पहली बार वोट देने वाले युवाओं को अपनी ओर खींचा.
द्रविड़ राजनीति के विकल्प के रूप में उभरना
पिछले 50 वर्षों से तमिलनाडु की राजनीति DMK और AIADMK के इर्द-गिर्द घूम रही थी. जनता के एक बड़े वर्ग, विशेषकर शहरी मध्यम वर्ग, ने विजय को एक 'तीसरे विकल्प' और बदलाव के प्रतीक के रूप में स्वीकार किया. जनता बदलाव चाहती है और जब स्टालिन
लोकलुभावन चुनावी वादे: विजय के घोषणापत्र में महिलाओं और गरीबों के लिए किए गए वादों ने गहरा असर डाला है:
महिलाओं को 2,500 रुपए प्रति माह की वित्तीय सहायता.
शादी के लिए 8 ग्राम सोना और रेशमी साड़ी की सहायता.
सालाना 6 मुफ्त रसोई गैस (LPG) सिलेंडर.
सरकारी स्कूलों के बच्चों के परिवारों को 15,000 की वार्षिक सहायता.
सनातन विरोधी टिप्पणियों का चुनाव पर असर
उदयनिधि स्टालिन से जुड़े कानूनी विवादों, विशेषकर संपत्ति की विसंगति और सनातन धर्म पर उनकी टिप्पणियों ने 2026 के चुनावों में DMK के खिलाफ एक मजबूत 'नैरेटिव' बनाने का काम किया है. इन मामलों ने विपक्षी दलों, विशेषकर थलापति विजय की TVK और BJP को "भ्रष्टाचार और वैचारिक ध्रुवीकरण" के मुद्दे पर DMK को घेरने का मौका दिया, जिससे तटस्थ और हिंदू मतदाताओं के एक वर्ग में नाराजगी देखी गई. कानूनी उलझनों के कारण सत्ता विरोधी लहर और गहरी हुई, जिसका सीधा फायदा विजय जैसे नए चेहरों को मिला, जिन्होंने खुद को एक स्वच्छ और समावेशी विकल्प के रूप में पेश किया. नतीजतन, ये विवाद न केवल चुनाव के दौरान चर्चा का केंद्र रहे, बल्कि इन्होंने युवा और शहरी मतदाताओं के वोटिंग पैटर्न को भी काफी हद तक प्रभावित किया है.
सनातन के विरुद्ध उदयनिधि ने क्या कहा था?
सितंबर 2023 में चेन्नई में आयोजित 'सनातन उन्मूलन सम्मेलन' में उदयनिधि स्टालिन ने बेहद विवादित टिप्पणी की थी. उन्होंने सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया, और कोरोना जैसी घातक बीमारियों से करते हुए कहा था कि इसका केवल विरोध करना काफी नहीं है, बल्कि इसे पूरी तरह से मिटा देना चाहिए.
कोर्ट ने माना 'हेट स्पीच'
मद्रास हाईकोर्ट ने जनवरी 2026 में उनकी इस टिप्पणी को 'हेट स्पीच' (नफरती भाषण) की श्रेणी में रखा, और सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा था कि उन्हें अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग करने के परिणामों के प्रति जागरूक होना चाहिए था. 4 मई 2026 को आ रहे चुनाव परिणामों में इस मुद्दे को DMK की संभावित हार का एक बड़ा वैचारिक कारण माना जा रहा है.
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