JPSC और फूड सेफ्टी अफसर नियुक्ति के आदेश पर स्टे, जानिए क्यों हाईकोर्ट ने रोका राज्य सरकार का फैसला?
सोचिए, आपने किसी बड़े सरकारी पद के लिए अपनी अच्छी-खासी पुरानी नौकरी छोड़ दी हो।

Jharkhand High Court: सोचिए, आपने किसी बड़े सरकारी पद के लिए अपनी अच्छी-खासी पुरानी नौकरी छोड़ दी हो। आपको बकायदा नियुक्ति पत्र मिल गया हो, आपने महीनों ट्रेनिंग भी पूरी कर ली हो और एक दिन अचानक रात के अंधेरे में सरकार फरमान जारी कर दे कि आपकी नौकरी रद्द कर दी गई है! झारखंड में 11वीं से 13वीं JPSC और फूड सेफ्टी ऑफिसर की परीक्षा पास करने वाले होनहार युवाओं के साथ बिल्कुल ऐसा ही हुआ था। लेकिन अब इस मामले में झारखंड हाईकोर्ट उन युवाओं के लिए 'मसीहा' बनकर सामने आया है और राज्य सरकार को तगड़ा झटका दिया है।
हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर लगाया ब्रेक
झारखंड सरकार ने हाल ही में एक नोटिफिकेशन जारी कर इन नवनियुक्त कर्मियों को नौकरी से हटाने का आदेश दिया था। सरकार के इसी तुगलकी फरमान के खिलाफ निराश हो चुके युवाओं ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इस मामले की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत में हुई। कोर्ट ने पूरे मामले की गंभीरता को समझते हुए JPSC की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्ति रद्द करने के सरकारी आदेश पर अगले आदेश तक के लिए तत्काल रोक लगा दी है। इसके साथ ही, अदालत ने राज्य सरकार और JPSC को नोटिस जारी कर इस पूरे मामले में सख्त जवाब भी मांगा है।
"हमारा क्या कसूर था..." अदालत में छलका अभ्यर्थियों का दर्द
इस पूरे विवाद में दीपमाला, सोनम कुमारी और सौरभ सिंह समेत कई अन्य अभ्यर्थियों ने तीन अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की थीं। अदालत में याचिकाकर्ता सोनम कुमारी की कहानी ने सबका ध्यान खींचा। उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस नौकरी के लिए उन्होंने अपनी पुरानी जगह की नौकरी छोड़ दी थी। 24 नवंबर 2025 को उनके हाथ में नियुक्ति पत्र आ गया था और उन्होंने अपनी सरकारी ट्रेनिंग भी पूरी कर ली थी। सबकुछ ठीक चल रहा था, लेकिन अचानक 18 अगस्त को सरकार ने एक नोटिफिकेशन निकालकर उनकी नियुक्ति ही रद्द कर दी। युवाओं का सीधा सवाल था कि अगर सिस्टम में कोई गड़बड़ी थी, तो उसमें मेहनत से परीक्षा पास करने वाले इन निर्दोष युवाओं का क्या कसूर है? प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स और PAS पति ने बड़ी मजबूती से यह पक्ष कोर्ट के सामने रखा।
आखिर रातों-रात क्यों रद्द की गई थीं ये परीक्षाएं?
दरअसल, यह पूरा बखेड़ा सीआईडी (CID) जांच की एक रिपोर्ट के बाद खड़ा हुआ था। CID जांच में मिले कुछ तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात उन सभी परीक्षाओं को रद्द करने का बड़ा ऐलान कर दिया था, जिनमें विवादित एजेंसी 'टीडीपीएल' (TDPL) शामिल रही थी। सरकार ने न सिर्फ ये परीक्षाएं रद्द कीं, बल्कि साल 2014 से हुई सभी नियुक्ति परीक्षाओं में धांधली की आशंका जताते हुए जांच के आदेश दे दिए।
सरकार के इस बड़े फैसले के बाद कार्मिक और प्रशासनिक विभाग ने बकायदा अधिसूचना जारी की थी, जिसके तहत एक झटके में 22 परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया, 6 भर्ती प्रक्रियाओं को बीच में ही रोक दिया गया और 17 पुरानी परीक्षाओं को जांच के दायरे में डाल दिया गया। लेकिन अब हाईकोर्ट के इस अहम स्टे (रोक) के बाद उन युवाओं ने राहत की बड़ी सांस ली है, जिनकी नौकरी बिना किसी गलती के उनके हाथों से छिनने वाली थी।

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