Jharkhand (Ranchi): राज्य में जहाँ एक ओर दिव्यांगों के लिए कई सरकारी योजनाएं संचालित हैं और हर महीने 1000 रुपये की पेंशन भी दी जाती है, वहीं दूसरी ओर सैकड़ों दिव्यांग पिछले दो वर्षों से अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन पर बैठे हैं। हालांकि फिर भी इनकी हिम्मत अब तक नहीं टूटी हैं, अब इन्हें मजबूरन ज़ोमेटो चला कर अपना गुजारा करना पड़ रहा हैं।
इनका आरोप है कि ना तो सरकार उनकी मांगों पर ध्यान दे रही है और ना ही उन्हें परिवार का पर्याप्त सहयोग मिल पा रहा है। कठिन हालात के बावजूद ये लोग हार मानने को तैयार नहीं हैं। पेट पालने के लिए कई दिव्यांग अब ज़ोमैटो जैसी डिलीवरी सेवाओं के जरिए काम कर रहे हैं और अपने संघर्ष को जारी रखे हुए हैं।
प्रदर्शन कर रहे दिव्यांगों की मुख्य मांग है कि जिस तरह “मईया सम्मान योजना” के तहत महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है, उसी तरह उन्हें भी समान सम्मान और आर्थिक सहयोग मिले। अब देखना होगा कि सरकार इनकी मांगों पर कब तक ध्यान देती है।राज्य में जहाँ एक ओर दिव्यांगों के लिए कई सरकारी योजनाएं संचालित हैं और हर महीने 1000 रुपये की पेंशन भी दी जाती है, वहीं दूसरी ओर सैकड़ों दिव्यांग पिछले दो वर्षों से अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन पर बैठे हैं। हालांकि फिर भी इनकी हिम्मत अब तक नहीं टूटी हैं, अब इन्हें मजबूरन ज़ोमेटो चला कर अपना गुजारा करना पड़ रहा हैं।
इनका आरोप है कि ना तो सरकार उनकी मांगों पर ध्यान दे रही है और ना ही उन्हें परिवार का पर्याप्त सहयोग मिल पा रहा है। कठिन हालात के बावजूद ये लोग हार मानने को तैयार नहीं हैं। पेट पालने के लिए कई दिव्यांग अब ज़ोमैटो जैसी डिलीवरी सेवाओं के जरिए काम कर रहे हैं और अपने संघर्ष को जारी रखे हुए हैं।
प्रदर्शन कर रहे दिव्यांगों की मुख्य मांग है कि जिस तरह “मईया सम्मान योजना” के तहत महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है, उसी तरह उन्हें भी समान सम्मान और आर्थिक सहयोग मिले। अब देखना होगा कि सरकार इनकी मांगों पर कब तक ध्यान देती है।







