"मोमोज खाने चलें क्या..", जानिए युवाओं के मनपसंद स्ट्रीट फूड की कहां से हुई थी शुरुआत?
भारत में बेहद लोकप्रिय स्ट्रीट फूड मोमोज की शुरुआत 14वीं सदी में तिब्बत से हुई थी. ज्यादातर लोगों को इसके स्वाद के अलावे यह जानकारी नहीं है कि उनका पसंदीदा व्यंजन का इतिहास क्या है?

क्या आपको भी पसंद है 'मोमोज'? आजकल अधिकांश युवाओं के स्ट्रीट फूड की फहरिश्त में पहला नाम मोमोज का ही होता है. शाम होते ही लोगों का एक ही सवाल होता हैं- भाई मोमोज खाने चलें? आपके पसंदीदा व्यंजन की विस्तृत जानकारी के साथ पेश है आज का हमारा यह लेख.
मोमोज एक भाप में पका हुआ डिश है, जो कि मैदे से बनता है और इसके अंदर सब्जी/मांस भरा होता है. युवाओं का यह पसंदीदा स्ट्रीट फूड बन चुका है खास कर उत्तरी भाग में रहने वाले लोग इसे बहुत चाव से खाते हैं. लेकिन यह अब सिर्फ भारत के उत्तरी हिस्से तक ही नहीं सीमित हैं, इसकी लोकप्रियता पूरे भारत में फैल रहीं है. शाम होते ही मोमोज के ठेले/स्टॉल पर लोगों की लाइनें लग जाती है. इसी से हम इसकी लोकप्रियता का अंदाजा लगा सकते हैं. मोमोज में भी कई प्रकार आने लगे हैं जैसे steamed मोमो, फ्राइड मोमो, तंदूरी मोमो, अफगानी मोमो आदि. क्या आप जानते हैं कि हमारी यह मनपसंदीदा डिश भारत में कैसे और कहां से आई? आइए आज हम आपको बताते हैं कि मोमोज कब और कहां से आया.
कब और कहां से आया हमारा यह मनपसंदीदा मोमो?
मोमो (Momo) की उत्पत्ति 14वीं शताब्दी के आसपास तिब्बत में हुई थी जहां इसे "मोग-मोग" कहा जाता था. यह तिब्बती प्रवासियों और व्यापारियों के माध्यम से नेपाल और भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे लद्दाख, दार्जिलिंग, धर्मशाला, सिक्किम जैसे शहरों में फैला. 1960 के दशक में तिब्बती शरणार्थियों के साथ यह लोकप्रिय डिश भारत में आई और आज यह सबसे पसंदीदा स्ट्रीट फूड है. तिब्बत से आया यह डिश बहुत सादा हुआ करता था और इसे बिना किसी चटनी के खाया जाता था लेकिन भारत के लोगों ने इसे एक नया रूप दिया और इसके साथ लाल चटनी जोड़ दिया गया. साथ ही इसके प्रकारों में भी बढ़ोत्तरी हुई जैसे वेज मोमो, चिकन मोमो, मटन मोमो, पनीर मोमो आदि.
इसके फायदे और नुकसान
मोमोज तो आज कल सबके पसंदीदा हैं और लोग इसे लगभग हफ्ते में 3 से 4 बार तो खा ही लेते हैं पर क्या आपने कभी सोचा हैं कि यह स्वादिष्ट मोमोज के क्या फायदे और नुकसान हैं? नहीं ना? तो आज हम आपको इसके फायदे और नुकसान बताएंगे-
फायदे:
कम तेल: स्टीम्ड मोमोज में फ्राइड स्नैक्स की तुलना में कम वसा होती है.
प्रोटीन का स्रोत: चिकन या पनीर मोमोज से प्रोटीन मिलता है जो मांसपेशियों के लिए अच्छा है.
पोषण (सब्जियों के साथ): गोभी गाजर जैसे सब्जियों वाले मोमोज फाइबर और विटामिन प्रदान कर सकते हैं.
स्वादिष्ट: यह मूड को बेहतर बनाने वाला (Comfort Food) है.
नुकसान:
मैदा का प्रयोग: मैदा पाचन में मुश्किल होता है जिससे कब्ज, गैस और पेट की समस्याएं हो सकती हैं.
MSG (अजीनोमोटो): स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला MSG नर्वस सिस्टम, हृदय रोग और बीपी के लिए हानिकारक हो सकता है.
तीखी चटनी: ज्यादा तीखी चटनी पेट में जलन, सूजन और बवासीर का खतरा बढ़ा सकती है.
कच्ची सब्जियां: ठीक से न पकी सब्जियां बैक्टीरिया बढ़ा सकती हैं जिससे संक्रमण हो सकता है.
वजन बढ़ना: लगातार सेवन से शरीर में फैट जमा हो सकता है.
इसे हेल्थी कैसे बना सकते हैं?
बाहर बाजार में मिलने वाले मोमोज जितने स्वादिष्ट हैं उतने ही स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी. कई ठेले वाले बिना साफ-सफाई का ध्यान रखे इसे बनाते है और कई तो इसे बिना अच्छे से पकाए कच्चा भी खिला देते हैं. जिससे लोगों की तबियत खराब हो सकती है. अब ऐसी सूरत में खुद से घर पर मोमोज बनाना ही एक सही विकल्प है. आइए हम आपके बताते हैं कि घर पर हेल्थी और स्वादिष्ट मोमोज कैसे बना सकते हैं -
• मैदा की जगह आटे (Whole wheat) के मोमोज खाएं.
• घर पर ताजी सब्जियों और कम मसालों का प्रयोग करें.
• तीखी चटनी का सेवन कम करें.
अगर हम इन चीजों को ध्यान में रख कर मोमोज बनाए तो वो स्वादिष्ट के साथ-साथ हेल्थी भी बनेंगे. जिसे खा कर हमारा स्वास्थ्य और मन दोनों ही प्रसन्न रहेंगे.
Research & Written by: Astha Rai
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