झारखंड की खनिज संपदा पर डाका बर्दाश्त नहीं!, MMDR बिल पर केंद्र के खिलाफ बरसे बन्ना गुप्ता, 27 अगस्त को महाधरना
MMDR बिल 2026 के खिलाफ बन्ना गुप्ता ने केंद्र सरकार पर हमला बोला। झारखंड के खनिज अधिकार, जल-जंगल-जमीन और स्थानीय हितों की रक्षा की मांग को लेकर 27 अगस्त को महाधरना होगा।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए MMDR (खान एवं खनिज विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 के खिलाफ कड़ा मोर्चा खोल दिया है। जमशेदपुर में आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और इस विधेयक को तुरंत वापस लेने की मांग की। बन्ना गुप्ता ने आरोप लगाया कि इस प्रस्तावित कानून के जरिए झारखंड के जल, जंगल, जमीन, खनिज संपदा और राज्य के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने की सोची-समझी कोशिश की जा रही है।
'खनिज संपदा से देश बना धनवान, बदले में झारखंड को मिला सिर्फ विस्थापन'
पूर्व मंत्री ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि MMDR 2026 केवल खान और खनिज से जुड़ा साधारण कानून नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर झारखंड के अस्तित्व, प्राकृतिक संसाधनों और संघीय ढांचे से जुड़ा बड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि झारखंड की धरती ने देश के औद्योगिक विकास में ऐतिहासिक योगदान दिया है और यहां के खनिज देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहे हैं। इसके बावजूद झारखंडवासियों को बदले में केवल विस्थापन, गंभीर प्रदूषण, बेरोजगारी और सामाजिक-आर्थिक मुश्किलें ही झेलनी पड़ी हैं। उन्होंने साफ किया कि राज्य की खनिज संपदा के उपयोग पर पहला हक सिर्फ और सिर्फ झारखंड के लोगों का होना चाहिए।
बन्ना गुप्ता ने रखीं केंद्र सरकार के सामने 5 प्रमुख मांगें
प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व मंत्री ने केंद्र सरकार के समक्ष पांच सूत्री प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने मांग की कि राज्य के खनिज संसाधनों पर झारखंड सरकार का निर्णायक और संवैधानिक अधिकार सुरक्षित किया जाए। खनन परियोजनाओं के नाम पर आदिवासी, मूलवासी और स्थानीय लोगों के जल, जंगल और जमीन से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। इसके अलावा कोयला, लौह अयस्क, तांबा, यूरेनियम, बॉक्साइट और सोने जैसे बहुमूल्य खनिजों से मिलने वाले भारी राजस्व में राज्य को उचित वित्तीय हिस्सा दिया जाए और स्थानीय युवाओं को नौकरियों में पहली प्राथमिकता मिले। उन्होंने केंद्र से संघीय ढांचे का सम्मान करते हुए राज्य सरकारों को दरकिनार कर एकतरफा नियंत्रण बढ़ाने की नीति को तत्काल बंद करने की मांग की।
'खनिज निकालने की जमीन भर नहीं है झारखंड', 27 अगस्त को डीसी दफ्तर पर महाधरना
बन्ना गुप्ता ने दो टूक शब्दों में कहा कि झारखंड की पावन धरती केवल खनिज निकालने की भूमि नहीं है, बल्कि यह यहां के जनमानस की पहचान, जीवन और भविष्य का आधार है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि वह राज्य सरकार, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रभावित समुदायों से व्यापक चर्चा किए बिना इस विधेयक को जबरन न थोपे। उन्होंने ऐलान किया कि अपने जल, जंगल, जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक संघर्ष तेज किया जाएगा। इसी कड़ी में आगामी 27 अगस्त को जमशेदपुर उपायुक्त कार्यालय के समक्ष जोरदार धरना-प्रदर्शन आयोजित होगा और उपायुक्त के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम मांग पत्र सौंपा जाएगा।
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