14 महीने बाद भी चार्जशीट नहीं, IAS अफसरों पर उठे सवाल!, झारखंड शराब घोटाले की CBI जांच वाली PIL पर हाईकोर्ट में सुनवाई
झारखंड शराब घोटाले की CBI जांच की मांग वाली PIL पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा। 14 महीने बाद भी चार्जशीट दाखिल न होने और डिफॉल्ट बेल पर सवाल उठे।

Jharkhand High Court: झारखंड में बहुचर्चित कथित शराब घोटाले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को झारखंड उच्च न्यायालय में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार को इस याचिका की मेंटेबिलिटी (सुनवाई योग्य होने) और इससे जुड़े तमाम बिंदुओं व तथ्यों पर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 1 अक्टूबर की तिथि निर्धारित की है। प्रार्थी की ओर से वरीय अधिवक्ता राजीव सिन्हा ने अदालत में जोरदार दलीलें पेश कीं।
बाबूलाल मरांडी ने दाखिल की है याचिका, IAS और रसूखदारों पर सांठगांठ का आरोप
झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की ओर से यह जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य में हुए करोड़ों रुपये के शराब सिंडिकेट और अनियमितताओं में वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारियों समेत कई प्रभावशाली और हाई-प्रोफाइल लोग सीधे तौर पर शामिल हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई है कि राज्य की जांच एजेंसियां बड़े चेहरों तक पहुंचने में नाकाम रही हैं, इसलिए इस पूरे घोटाले की निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा जाए।
'14 महीने में चार्जशीट नहीं, आरोपियों को मिली डिफॉल्ट बेल'
याचिका में राज्य सरकार और जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिका के तथ्यों के अनुसार, इस पूरे मामले को लेकर वर्ष 2025 में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा विधिवत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके बाद कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई थी, लेकिन तय समय सीमा के भीतर जांच पूरी न होने के कारण आरोपियों को डिफॉल्ट बेल मिल गई और वे जेल से बाहर आ गए।
याचिका में साफ तौर पर यह बिंदु उठाया गया है कि करीब 14 महीने का लंबा वक्त बीत जाने के बावजूद भी अब तक मुख्य आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल नहीं किया जा सका है और मामला केवल अनुसंधान के नाम पर ही अटका हुआ है। अदालत ने इन सभी तथ्यों को रिकॉर्ड पर लेते हुए सरकार को जवाब देने का समय दिया है, जिस पर 1 अक्टूबर को अगली विस्तृत बहस होगी।
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