77 के हुए राकेश शर्मा, Internet की दुनिया से दूर किस हाल में हैं भारत के प्रथम अंतरिक्ष यात्री!
1984 में भारत की ओर से पहली बार अंतरिक्ष में तिरंगा लहराने वाले विंग कमांडर और अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा आज 78वें वर्ष में कदम रख चुके हैं. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सवाल पर उनका जवाब "सारे जहां से अच्छा" आज भी लोगों को उत्साह से भर देता है.

RAKESH SHARMA: साल 1984 में भारत की ओर से पहली दफा किसी ने धरती से कोसों दूर अंतरिक्ष पर भारत का परचम लहराया था, वह और कोई नहीं राकेश शर्मा ही थे. जिनका आज हम जन्मदिन मना रहे हैं. करियर में ऊंची उड़ान भरने के सपने को पूरा करने की दिशा में पूरे भारतवर्ष के लिए मिशाल के तौर पर जाने जाने वाले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा ने जब अंतरिक्ष में भारतीय तिरंगा लहराकर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से फोन पर बात की थी, तो प्रधानमंत्री ने पूछा था - "अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखाई देता है?" इसपर सबका दिल जीत लेने वाला जवाब दिया था उन्होंने. जबाव में राकेश शर्मा ने कहा था - "सारे जहां से अच्छा".

भारतीय अंतिक्ष का पहला अध्याय 'राकेश शर्मा'
राकेश शर्मा का यह बेमिसाल जवाब आज भी भारतवासियों के दिलों में बसा करता है. यह भारत के लिए गर्व का पल था, क्योंकि राकेश शर्मा करोड़ों भारतीयों के सपनों के दूत बनकर अंतरिक्ष में पहुंचे थे. भारतीय अंतरिक्ष के इतिहास में स्वर्णाक्षरों से उकेरे गए पहले अध्याय के तौर पर याद किए जाते हैं 'राकेश शर्मा' और जब भी भारतीय अंतरिक्ष उड़ाने की बात होगी, हमेशा याद किए जाते रहेंगे.

कैसे संभव हुई उनकी अंतरिक्ष यात्रा
अंतरिक्ष यात्री बनना सिर्फ एक रोमांचक अनुभव नहीं था, बल्कि यह खुद को तराशने जैसी कठिन प्रक्रिया थी. 1982 में चुने जाने के बाद, उन्हें मॉस्को के पास 'स्टार सिटी' भेजा गया, जहां उनका प्रशिक्षण किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था. उन्हें दो महीने में रूसी भाषा सीखनी थी, क्योंकि अंतरिक्ष यान के सभी मैनुअल रूसी में थे. बेंगलुरु में उन्हें 72 घंटे तक एक बंद कमरे में अकेला रखा गया, यह देखने के लिए कि क्या वे अंतरिक्ष के अकेलेपन को झेल सकते हैं. 'सेंट्रीफ्यूज' मशीनों में उनके शरीर पर गुरुत्वाकर्षण का इतना दबाव डाला जाता था कि सांस लेना भी मुश्किल हो जाता था. लेकिन राकेश शर्मा अडिग रहे. उनके साथ बैकअप के तौर पर विंग कमांडर रवीश मल्होत्रा भी थे, जो अंतिम समय तक उनके साथ साए की तरह डटे रहे.

3 अप्रैल 1984 को भारत ने इतिहास रचा जब राकेश शर्मा अंतरिक्ष में पहुंचने वाले पहले भारतीय बने. बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से सोयूज-यू रॉकेट से हुई इस उड़ान ने भारत को मानव अंतरिक्ष भेजने वाला 14वां देश बना दिया. राकेश शर्मा ने अंतरिक्ष में करीब 7 दिन, 21 घंटे और 40 मिनट बिताए और वहां से भारत की ऐसी तस्वीरें लीं जिन्होंने देश के नक्शे को समझने में क्रांति ला दी.
कैसी है उनकी आज की जिंदगी?
इंटरनेट की चकाचौंध से दूर शांति से जीवन व्यतीत करते हुए राकेश शर्मा फिल्हाल तमिलनाडु के कुन्नूर में अपनी पत्नी के साथ रह रहे हैं. वे कुन्नूर में गोल्फ खेलते हैं, साथ ही योग, बागवानी और पढ़ाई भी किया करते हैं.
बनाए गए गगनयान मिशन के सलाहकार
हाल ही में राकेश शर्मा को गगनयान मिशन का सलाहकार नियुक्त किया गया है. जहां वे वैज्ञानिकों की मदद किया करते हैं.
specializes in local and regional stories, bringing simple, factual, and timely updates to readers.
Related Posts

महिलाओं के खिलाफ अपराध समाज की गहरी संरचनात्मक समस्या का परिणाम: न्यायमूर्ति विक्रमनाथ

AAP पर BJP की सेंधमारी ! उड़ा लिए 7 राज्यसभा सांसद, संजय सिंह ने कहा- मोदी-शाह ने खेली घटिया राजनीति







