एओ-नागा लोक कलाओं के संरक्षक गुरु संग्युसंग पोंगनर: 2026 के पद्म श्री से किए जाएंगे सम्मानित
नागा वाडिर वेलफेयर कल्चरल क्लब के सह-संस्थापक और महासचिव गुरु संग्युसंग पोंगनर ने छह दशकों से अधिक समय तक एओ-नागा सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया है. संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित गुरु पोंगनर ने अब तक 2,000 से अधिक युवा कलाकारों को प्रशिक्षित किया है.

Kohima, Nagaland: भारत देश के संदर्भ में यह प्रचलित कथन है कि गांवों में बसती है भारत देश की आत्मा. ऐसे में यह सिद्ध हो जाता है कि यदि किसी देश की संस्कृति का लुत्फ उठाना हो तो गांवों में और वहां बसे जनजातीय लोगों से रूबरू होने का प्रयास कीजिए. नागालैंड के गुरु संग्युसंग पोंगनर का भी भारतीय नागा जनजाति की प्रसिद्ध एओ-नागा लोक कला को सहेजने में प्रमुख योगदान रहा है. इसी को ध्यान में रखते हुए इन्हें 2026 के पद्म श्री सम्मान से सम्मानित किया जा रहा है. वह 'नागा वाडिर वेलफेयर कल्चरल क्लब' के सह-संस्थापक हैं और इसके स्थापना काल से ही महासचिव के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
पारंपरिक ज्ञान और व्यवस्थित शिक्षाशास्त्र का अनूठा संगम
23 मार्च 1945 को जन्मे गुरु संग्युसंग पोंगनर की प्रारंभिक शिक्षा नागालैंड बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन से हुई, जहाँ से उन्होंने हाई स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट प्राप्त किया. इसके बाद उन्होंने गुवाहाटी विश्वविद्यालय से उच्च माध्यमिक स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट की शिक्षा पूरी की. अकादमिक शिक्षा के साथ-साथ वह सामुदायिक भागीदारी और वरिष्ठों के मार्गदर्शन के माध्यम से स्वदेशी लोक परंपराओं में पूरी तरह पारंगत हुए. उनके इसी विशद व्यावहारिक अनुभव ने पारंपरिक ज्ञान को और समृद्ध किया, जिससे उन्हें मौखिक विरासत को एक व्यवस्थित शिक्षाशास्त्र के रूप में नई पीढ़ी से जोड़ने में बड़ी सहायता मिली.
छह दशकों का योगदान और कला-दीक्षा कार्यक्रम
गुरु पोंगनर ने पिछले छह दशकों से अधिक समय तक एओ-नागा सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने और उसे व्यापक रूप से समृद्ध करने का कार्य किया है. उनके कुशल नेतृत्व में नागा वाडिर कल्चरल क्लब के माध्यम से अब तक 2,000 से अधिक युवा कलाकारों को लोक कलाओं का प्रशिक्षण प्राप्त हुआ है, जबकि 100 से अधिक विशिष्ट प्रशिक्षुओं को उनका प्रत्यक्ष मार्गदर्शन मिला है. उनकी मूल लोक रचनाओं का मंचन स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर के अलावा अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी किया जाता है. भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के 'कला-दीक्षा' कार्यक्रम के अंतर्गत उनके मार्गदर्शन में कई छात्रों और सांस्कृतिक संगठनों द्वारा एओ-नागा परंपराओं के संरक्षण का कार्य निरंतर सुनिश्चित किया जा रहा है.
राष्ट्रीय पुरस्कार और मानद उपाधियों से हुए सम्मानित
सांस्कृतिक क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए समय-समय पर उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया है. गुरु पोंगनर को वर्ष 2002 में भारत सरकार द्वारा 'संगीत नाटक अकादमी राष्ट्रीय पुरस्कार' से सम्मानित किया गया था. इसके बाद वर्ष 2012 में इग्नू (IGNOU), नई दिल्ली के सहयोग से उत्तर पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (NEZCC) द्वारा उन्हें 'गुरु उपाधि' प्रदान की गई. वर्ष 2017 में नागालैंड सरकार ने उन्हें 'राज्यपाल पुरस्कार' से विभूषित किया. वर्तमान में वर्ष 2024 से वे संस्कृति मंत्रालय के कला-दीक्षा कार्यक्रम के अधीन देश भर के शिष्यों का मार्गदर्शन कर रहे हैं.
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