पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून: 10 करोड़ तक का जुर्माना, 5 महीने में फैसले के लिए बनेंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट
नीट और नेट जैसी परीक्षाओं में धांधली पर सरकार का बड़ा प्रहार: 2 महीने में जांच और 3 महीने में सजा, नंदन नीलेकणि व इसरो चीफ संभालेंगे तकनीकी सुरक्षा की कमान

नई दिल्ली: देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार सामने आने वाली धांधली और पेपर लीक की घटनाओं से युवाओं में पैदा हुए असंतोष के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। नीट (NEET), यूजीसी नेट (UGC NET) जैसी राष्ट्रीय और कई राज्य स्तरीय परीक्षाओं में गड़बड़ी के मामलों को देखते हुए, सरकार ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम को और अधिक कड़ा बनाने का निर्णय लिया है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक का प्रस्ताव पेश किया।
लोकसभा में विधेयक पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि नए संशोधनों का मुख्य उद्देश्य संगठित पेपर लीक गिरोहों, सॉल्वर गैंग और फर्जीवाड़े में शामिल परीक्षा केंद्रों व कोचिंग संस्थानों की नकेल कसना है। नए प्रावधानों के तहत संगठित अपराध में लिप्त दोषियों के लिए सजा को बढ़ाकर 7 से 10 साल की जेल कर दिया गया है, जबकि आर्थिक दंड की राशि को 1 करोड़ से बढ़ाकर सीधे 10 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है। मामलों के जल्द निपटारे के लिए कानून में नया सेक्शन 12A जोड़ा गया है, जिसके तहत देशभर में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जा रहे हैं। नए नियमों के अनुसार, जांच एजेंसी को 2 महीने के भीतर अपनी जांच पूरी करनी होगी और कोर्ट को अगले 3 महीने में अपना अंतिम फैसला सुनाना होगा। यानी घटना की रिपोर्ट दर्ज होने के मात्र 5 महीने के भीतर न्याय प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इस फैसले के खिलाफ अपील भी केवल हाई कोर्ट की डबल बेंच में ही 30 दिनों के भीतर स्वीकार की जाएगी। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड जैसे राज्यों में इन अदालतों के गठन की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी गई है।
भविष्य में परीक्षाओं को तकनीकी रूप से पूरी तरह 'लीक-प्रूफ' बनाने के लिए सरकार ने एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का भी गठन किया है। इस टास्क फोर्स में इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि, इसरो चीफ एस. सोमनाथ, पूर्व डीआईबी तपन डेका और आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामाकोटी जैसे तकनीक और शिक्षा जगत के दिग्गज शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, पूर्व में गठित राधाकृष्णन समिति की 46 प्रमुख सिफारिशों में से लगभग 76 प्रतिशत को सरकार पहले ही लागू कर चुकी है। यह नया कानून देश के करोड़ों मेहनती युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली बहाल करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
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