PMO को अब जाना जाएगा - "सेवा तीर्थ" के नाम से, कर्तव्य-बोध को बनाया जाएगा और अधिक सुदृढ़!
नामों को बदलने के सिलसिले में अब PMO के नाम को भी बदल दिया गया है. PMO को अब नए नाम "सेवा तीर्थ" के नाम से जाना जाएगा. संबंधित अधिकारियों का कहना है कि ये कदम औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर आने व कार्य को और अधिक कुशल बनाने के मंशे से उठाया गया है.

NEW DELHI: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का आधिकारिक नाम अब बदलकर "सेवा तीर्थ" रखा गया है. इस बदलाव का उद्देश्य केवल नाम बदलना नहीं, बल्कि कार्यालय की मूल पहचान सेवा और जन-संपर्क की भावना को सामने लाना है.
नए नाम Seva Teerth में सेवा शब्द यह दर्शाता है कि यह कार्यालय जनता के प्रति समर्पित है जनता की उनकी समस्याओं, सुझावों और हितों के लिए. वहीं तीर्थ शब्द एक पवित्र, धार्मिक या श्रद्धा-स्थान जैसा आभास देता है यह बताता है कि देश की सेवा एक पुण्य कार्य, एक जिम्मेदारी है.
दरअसल, यह नाम परिवर्तन और स्थानान्तरण (relocation) Central Vista Redevelopment Project के अंतर्गत हो रहा है, जिसमें PMO के नए परिसर को सेवा तीर्थ-1 नाम दिया गया है. वहीं अन्य महत्वपूर्ण कार्यालयों जैसे कैबिनेट सचिवालय, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार कार्यालय आदि को क्रमश सेवा तीर्थ-2 और सेवा तीर्थ-3 नाम दिए गए हैं.
सरकार की मंशा है कि इस बदलाव के माध्यम से चाहे नाम हो, भवन या प्रतीक - एक नया administrative दृष्टिकोण स्थापित हो: सत्ता नहीं, कर्तव्य और सेवा यानी सत्ता को अधिकार नहीं बल्कि जिम्मेदारी माना जाए. इससे यह भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव भी मजबूत होगा. इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि PMO अब सिर्फ एक कार्यालय नहीं, बल्कि एक नया हाई-टेक, आधुनिक, सुरक्षित और समर्पित सेवा केंद्र/तीर्थ बनेगा जहां सरकारी कामकाज अधिक कुशल, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित होगा.
अधिकारियों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तहत, शासन की जगहों को 'कर्तव्य' और ट्रांसपेरेंसी दिखाने के लिए नया रूप दिया गया है.
उन्होंने कहा, "हर नाम, हर इमारत और हर निशान अब एक आसान विचार की ओर इशारा करता है. सरकार सेवा करने के लिए है."
हाल ही में, सरकार ने राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक पेड़ों से घिरे रास्ते, राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ कर दिया.
नाम बदलने का मतलब है कि पुरानी औपनिवेशिक-कालीन या पारंपरिक प्रतीकों से एक नया, समकालीन और सेवा-आधारित दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है. यह केवल PMO तक सीमित नहीं - देश के अन्य संवेदनशील कार्यालयों, सचिवालयों और राजभवनों के नाम भी इस मंत्र लोक-सेवा, कर्तव्य-बोध, जन-कल्याण के अनुरूप बदले जा रहे हैं. “PMO → Seva Teerth” सिर्फ नाम परिवर्तन नहीं यह सरकार के प्रशासनिक, नैतिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण में एक प्रतीकात्मक और व्यावहारिक बदलाव है. यह बदलाव इस संदेश को दोहराता है कि सत्ता का मतलब अधिकार नहीं, सेवा और जिम्मेदारी है - और इस नज़रिए के साथ, भारत का प्रशासन एक नए युग में कदम रख रहा है.
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