Pakistan Air Strike on Afghanistan: अफगान अधिकारियों के मुताबिक, सोमवार रात करीब 9 बजे काबुल में नशामुक्ति के लिए बने एक अस्पताल पर हमला हुआ, जिसमें कम से कम 400 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक लोग घायल हो गए. अफगानिस्तान ने इस हमले के लिए पाकिस्तान को दोषी ठहराया, जबकि पाकिस्तान ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया.

पाकिस्तान का अस्पताल पर हमले से इनकार
वहीं पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने पुनर्वास केंद्र पर हमले की बात से इनकार किया. मंत्रालय ने कहा कि हवाई हमले केवल सैन्य ठिकानों और काबुल तथा पूर्वी अफगान प्रांत नंगरहार में स्थित "आतंकवादी सहायता सुविधाओं" को निशाना बनाकर किए गए थे.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने हमले को बताया अमानवीय और कायरतापूर्ण
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक बयान में कहा कि हिंसा का यह कायरतापूर्ण और अमानवीय कृत्य, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों की जान गई है, किसी भी तरह से सैन्य लक्ष्य के रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अब इस नरसंहार को सैन्य अभियान का नाम देने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की यह जघन्य आक्रामकता अफगानिस्तान की संप्रभुता पर एक स्पष्ट हमला है और क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए सीधा खतरा है. जायसवाल ने कहा कि यह पाकिस्तान के लापरवाह व्यवहार के लगातार पैटर्न और अपनी आंतरिक विफलताओं को सीमा पार हिंसा के बढ़ते हताश कृत्यों के माध्यम से बाहरी रूप देने के बार-बार किए जाने वाले प्रयासों को दर्शाता है.
पाकिस्तान की इस हमले के पीछे क्या है मनसा?
पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर यह कायराना हमला क्यों किया, इसे समझने के लिए हमें पाकिस्तान के हालात और अपने सहयोगी देशों के साथ उनके रिश्तों की पीछे की मजबूरी को भी समझना पड़ेगा.
ईरान पर अमेरिका और इजरायल द्वारा किए जा रहे हमले के बाद एशिया सहित पूरी दुनिया विभिन्न आवश्यक वस्तुओं की महंगाई से जूझ रही है. जिसमें सबसे अधिक दिक्कत कच्चे तेल के आयात में उठानी पड़ रही है. साथ ही पाकिस्तान की वर्तमान सत्ताधारियों को अपनी सत्ता भी बचानी है. जिस कारण अपने आवाम का ध्यान मौजूदा देश के हाल से भटकाने के लिए पाकिस्तान को ऐसे हमले करने थे. जनता का इससे ध्यान भी बाहरी मुद्दों पर चला जाएगा और अमेरिका से दोस्ती भी बरकरार रहेगी. जियोपॉलीटिक्स की आम समझ भी रखने वालों को यह समझने में ज्यादा सर खपाने की जरूरत नहीं है कि अमेरिका ने भी ईरान पर हमला जनता को एप्सटीन के मुद्दे से भटकाने के लिए किया था. जिसका साथ अब पाकिस्तान भी बखूबी देता नजर आ रहा है.
दूसरी ओर आपको याद ही होगा पाकिस्तान ने सऊदी के साथ एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. जिसके तहत दोनों में से कोई भी देश किसी अन्य देश के साथ युद्ध जैसी परिस्थितियों में फंसता है तो दूसरा उसकी मदद के लिए उसके साथ खड़ा रहेगा. ईरान का सऊदी पर हमला जारी है, जिससे बाहर रहने का भी पाकिस्तान को एक अच्छा बहाना चाहिए था, जो शायद मिल चुका है.






