‘मुआवजा नहीं, पहले इंसाफ चाहिए’... भरत तिवारी के परिवार ने सरकार की पेशकश ठुकराई
भोजपुर के बिलौटी गांव में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए भरत तिवारी के परिवार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर से घोषित आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी पर फिलहाल असहमति जताई है। परिवार की मांग है कि पहले घटना के सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर कड़ी सजा दी जाए।


भोजपुर: बिलौटी गांव में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए भरत तिवारी के परिवार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर से घोषित आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी के प्रस्ताव पर फिलहाल असहमति जताई है। परिवार का कहना है कि इस समय उनकी प्राथमिकता मुआवजा या नौकरी नहीं, बल्कि घटना में शामिल सभी आरोपियों की गिरफ्तारी और उन्हें सजा दिलाना है।
भरत तिवारी की मां आशा देवी का कहना है कि जब तक उनके बेटे की मौत के लिए जिम्मेदार सभी लोगों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती, तब तक परिवार सरकार से दिया गया कोई भी आर्थिक सहायता न्ही लेगा। उन्होंने सरकार से पहले न्याय दिलाने की बात कही. आशा देवी के अनुसार, घटना में शामिल सभी लोगों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आरोपियों की गिरफ्तारी और सजा के बा ही परिवार सरकार की ओर से दिए गए नौकरी और आर्थिक सहायता को अपनाने के बारे में सोचेगा।
‘सरकार की घोषणा से संतुष्ट नहीं’
भरत तिवारी की भाभी सुमन तिवारी ने भी सरकार की घोषणा पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि मामले में अभी तक सिर्फ एक आरोपी की गिरफ्तारी हुई है, जबकि घटना के वक्त कई बड़े अधिकारी वहाँ मौके पर मौजूद थे।
सुमन तिवारी ने कहा कि परिवार सभी जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ कार्रवाई चाहता है। उन्होंने भरत तिवारी को शहीद का दर्जा देने और घटनास्थल पर स्मारक बनाने की भी मांग रखी है। परिवार ने घटना से प्रभावित विस्थापित लोगों के लिए उचित व्यवस्था किए जाने की भी मांग की है।
मुख्यमंत्री ने की थी आर्थिक सहायता और नौकरी की घोषणा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट के ज़रिए भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता और एक परिजन को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की थी। लेकिन परिवार ने इस सहायता को ठुकरा दिया. सरकार के मुताबिक, यह फैसला न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था। आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर ही सरकार ने परिवार के लिए सहायता और नौकरी की घोषणा की है। भरत तिवारी की 17 जून 2026 को पुलिस मुठभेड़ में गोली लगने से मौत हुई थी। अब परिवार की मांग साफ है- पहले आरोपियों की गिरफ्तारी और न्याय, उसके बाद ही किसी आर्थिक सहायता या सरकारी नौकरी पर विचार।

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