300 बेड के अस्पताल निर्माण में लापरवाही या कुछ और? विनोद की मौत का सस्पेंस गहराया, उठ रहे कई सवाल?
गोड्डा के महुवारा स्थित 300 बेड अस्पताल निर्माण स्थल पर मिक्सर चालक विनोद महतो की संदिग्ध मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।


GODDA: गोड्डा जिले के महागामा प्रखंड अंतर्गत महुवारा में निर्माणाधीन 300 बेड के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में मिक्सर चालक विनोद कुमार महतो (28) की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी मौत की असली वजह साफ नहीं हो सकी है, जिससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, ताकि मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सके और निष्पक्ष जांच आगे बढ़ सके।
लीपापोती की आशंका और बिना जांच काम शुरू होने पर उठे सवाल
घटना के बाद स्थानीय स्तर पर मामले को दबाने और लीपापोती करने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जिला प्रशासन ने एक तकनीकी टीम से पूरी जांच कराने और तब तक के लिए अस्पताल निर्माण कार्य को रोकने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद बिना जांच प्रक्रिया पूरी हुए निर्माण एजेंसी ने दोबारा काम शुरू कर दिया, जिससे प्रशासन की भूमिका पर भी कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। घटना की जानकारी मिलने के बाद कांग्रेस जिलाध्यक्ष याहिया सिद्दीकी ने भी अस्पताल पहुंचकर एजेंसी पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया था और निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी और गिरने के दावे पर सस्पेंस
प्रारंभिक पड़ताल में यह बात खुलकर सामने आई है कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों की जमकर अनदेखी की जा रही थी। मजदूरों को न तो पर्याप्त सुरक्षा किट उपलब्ध कराए गए थे और न ही नियमों का पालन हो रहा था। बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के इतनी ऊंचाई पर काम कराना सीधे तौर पर जिंदगी से खिलवाड़ माना जा रहा है। 31 जुलाई को बोकारो जिले के गोमिया निवासी विनोद कुमार महतो की मौत के बाद साथी मजदूरों ने ऊंचाई से गिरने की आशंका जताई थी, लेकिन घटनास्थल की स्थिति इस दावे से बिल्कुल मेल नहीं खाती। विशेषज्ञों का कहना है कि मिक्सर वाहन चलाने के लिए चालक को ऊपर जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती, ऐसे में ऊंचाई से गिरने की बात पूरी तरह संदिग्ध लग रही है।
अस्पताल पहुंचाने में देरी और परिजनों के बयानों में विरोधाभास
घटना के दिन सभी मजदूर दोपहर का खाना खा रहे थे, तभी विनोद मिक्सर वाहन देखने की बात कहकर गया और कुछ ही देर बाद वह खून से लथपथ हालत में पाया गया। आरोप है कि उसे महागामा रेफरल अस्पताल पहुंचाने में भी काफी देरी की गई, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक की शादी महज 8 महीने पहले ही हुई थी, जिससे परिवार में मातम पसरा हुआ है।
जांच के समय नदारद मिले जिम्मेदार अधिकारी, स्थानीय लोगों में गुस्सा
घटना के बाद जब अनुमंडल अधिकारी आलोक वरण केसरी, एसडीपीओ वरुण रजक, सीओ डॉ. खगेन महतो और थाना प्रभारी समेत पूरी प्रशासनिक टीम जांच के लिए मौके पर पहुंची, तो वहां कोई भी जिम्मेदार अधिकारी जानकारी देने के लिए मौजूद नहीं था। स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि यहां स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के बजाय बाहरी मजदूरों से काम लिया जा रहा है, जबकि स्थानीय लोग पलायन करने को मजबूर हैं। लोगों ने बताया कि इससे पहले भी एक मजदूर की मौत को दिल का दौरा बताकर मामला रफा-दफा कर दिया गया था। फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दे रही है।

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