Video!: बोकारो के कसमार में छुपा है 'प्राकृतिक जन्नत'!, घने जंगलों और वादियों के बीच झरने का लुत्फ उठाने उमड़ रहे लोग
बोकारो जिले के कसमार प्रखंड अंतर्गत झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा पर स्थित 'सेवती घाटी' इन दिनों प्रकृति प्रेमियों और सैलानियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।


Bokaro: बोकारो जिले के कसमार प्रखंड अंतर्गत झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा पर स्थित 'सेवती घाटी' इन दिनों प्रकृति प्रेमियों और सैलानियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। सड़क के दोनों किनारों पर खड़े ऊंचे-ऊंचे हरे-भरे पहाड़, घनी वादियां और मनमोहक प्राकृतिक छटा यहां के सौंदर्य में चार चांद लगाती हैं। इस मनोरम घाटी की सबसे बड़ी खासियत सेवती पहाड़ की ऊंचाई से गिरने वाला वह रहस्यमयी झरना है, जिससे सालों भर लगातार पानी गिरता रहता है। मानसून के इस मौसम में जलस्तर और पानी का बहाव बढ़ जाने से यह नजारा और भी ज्यादा विहंगम व खूबसूरत हो गया है।


सालों भर बहती है अविरल जलधारा, उद्गम स्थल अब भी रहस्य
सेवती घाटी से गुजरने वाले हर मुसाफिर की नजर पहाड़ों के सीने को चीरकर गिरते इस शीतल झरने पर अनायास ही टिक जाती है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस पहाड़ से 12 महीने लगातार पानी कहां से और कैसे आता है, इसका ठोस रहस्य अब तक सामने नहीं आ पाया है। माना जाता है कि झरने का प्राकृतिक स्रोत पहाड़ के सबसे ऊपरी दुर्गम हिस्से में स्थित है, जहां से घने पेड़-पौधों और चट्टानों के बीच रास्ता बनाती हुई दूधिया जलधारा काफी ऊंचाई से नीचे गिरती है।

मीठा और औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है झरने का पानी
स्थानीय लोगों और वहां रुकने वाले राहगीरों का कहना है कि इस झरने का पानी बेहद शीतल, साफ और प्राकृतिक रूप से मीठा है। स्थानीय मान्यता है कि घने जंगलों और दुर्लभ वनस्पतियों से होकर गुजरने के कारण इस पानी में प्राकृतिक जड़ी-बूटियों के औषधीय गुण भी मौजूद हो सकते हैं। हालांकि, इस बात की अभी तक कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यहां से गुजरने वाले लोग इसे अमृत मानकर बड़े चाव से पीते हैं।

राहगीरों के लिए बना लोकप्रिय सेल्फी प्वाइंट, पर्यटन विकास की दरकार
सेवती घाटी मार्ग से सफर करने वाले लोग इस झरने के पास अपनी गाड़ियां रोककर कुछ पल सुकून के बिताते हैं। लोग न केवल इस मीठे पानी से अपनी प्यास बुझाते हैं और हाथ-मुंह धोकर ताजगी महसूस करते हैं, बल्कि खूबसूरत वादियों के बीच इस मनोहारी दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते हैं।

यही कारण है कि यह स्थल अब युवाओं और परिवारों के लिए एक बेहतरीन सेल्फी प्वाइंट में तब्दील हो चुका है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि प्रशासन इस प्राकृतिक स्थल को ईको-टूरिज्म के रूप में विकसित करे और इसके प्राकृतिक स्वरूप व हरियाली के संरक्षण की ठोस पहल करे, तो यह क्षेत्र राज्य के बड़े पर्यटन मानचित्र पर उभर सकता है।



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