Muzaffarpur: 'घूसखोर' थानेदार पर गिरी गाज, वीडियो वायरल होने के बाद गिरफ्तारी के डर से हुए फरार
मुजफ्फरपुर के पीयर थाना के सब इंस्पेक्टर की रिश्वत लेते वीडियो वायरल हो गई है. कानून को ताक पर रखते हुए दरोगा अभिनंदन ने मामले को रफा-दफा करने के नाम पर 5,000 रुपये की घूस मांगी थी.जिस आरोपी (सीताराम) को पीयर पुलिस ने पकड़ा ही नहीं था, उसे छोड़ने के नाम पर दारोगा ने निर्लज्जता के साथ पैसे ले लिए.

Bihar (Muzaffarpur): बिहार पुलिस में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे जीरो टॉलरेंस अभियान के बावजूद कुछ अधिकारी महकमे की छवि को दागदार करने से बाज नहीं आ रहे हैं. ताजा मामला मुजफ्फरपुर जिले के पीयर थाना का है, जहाँ तैनात अपर थानेदार (सब इंस्पेक्टर) अभिनंदन कुमार को रिश्वत लेना भारी पड़ गया है. घूसखोरी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद न केवल उन्हें निलंबित कर दिया गया है, बल्कि तिरहुत रेंज के डीआईजी के आदेश पर उनके खिलाफ प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज की गई है.
क्या है पूरा मामला
यह पूरा विवाद एक अजीबोगरीब स्थिति और पुलिसिया भ्रष्टाचार के मेल से पैदा हुआ. जानकारी के अनुसार, पीड़ित शत्रुघ्न का भाई सीताराम हाल ही में शराब पीने के एक मामले में पकड़ा गया था. यह कार्रवाई वास्तव में उत्पाद विभाग की टीम ने की थी. हालांकि, शत्रुघ्न को लगा कि उसके भाई को पीयर थाने की पुलिस ने उठाया है.
अपने भाई को छुड़ाने की गुहार लेकर शत्रुघ्न एक बिचौलिए (दलाल) राम कुमार के माध्यम से अपर थानेदार अभिनंदन कुमार के पास पहुंचा. यहां कानून को ताक पर रखते हुए दरोगा अभिनंदन ने मामले को रफा-दफा करने के नाम पर 5,000 रुपये की घूस मांगी.
बिना गिरफ्तारी के ही वसूल ली रिश्वत
हैरानी की बात यह रही कि जिस आरोपी (सीताराम) को पीयर पुलिस ने पकड़ा ही नहीं था, उसे छोड़ने के नाम पर दारोगा ने निर्लज्जता के साथ पैसे ले लिए. रिश्वत के लेन-देन का यह पूरा घटनाक्रम मोबाइल के कैमरे में कैद हो गया. सोमवार को जैसे ही यह वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हुआ, पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. वीडियो में स्पष्ट दिख रहा था कि किस तरह एक वर्दीधारी अधिकारी खुलेआम बिचौलिए के जरिए सौदेबाजी कर रहा है.
SSP और DIG का कड़ा एक्शन
वीडियो का संज्ञान लेते हुए मुजफ्फरपुर के एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी अपर थानाध्यक्ष अभिनंदन कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. मामले की गंभीरता को देखते हुए तिरहुत रेंज के डीआईजी चंदन कुमार कुशवाहा ने इस पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने का सख्त आदेश दिया. डीआईजी के निर्देश के बाद पीयर थाने में ही आरोपी दारोगा और बिचौलिए राम कुमार के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है. पीड़ित के भाई के बयान पर दर्ज हुआ है केस .
थानाध्यक्ष की भूमिका पर उठे सवाल
इस पूरे प्रकरण में पीयर थानाध्यक्ष की कार्यशैली भी जांच के घेरे में है. चर्चा है कि प्राथमिकी के आदेश के बाद भी स्थानीय पुलिस स्तर पर मामले को दबाने और आरोपी दारोगा को बचाने की पुरजोर कोशिश की गई. पुलिस महकमे में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि कैसे एक संगीन मामले में भी विभाग के भीतर ही संरक्षण देने का प्रयास किया गया.
कार्रवाई के डर से फरार हुए दारोगा
जैसे ही गिरफ्तारी की तलवार लटकी, आरोपी अपर थानाध्यक्ष अभिनंदन कुमार विभागीय प्रक्रियाओं को ठेंगा दिखाते हुए अवकाश (छुट्टी) पर चले गए. पुलिस सूत्रों की मानें तो वह गिरफ्तारी के डर से अंडरग्राउंड हो गए हैं. पुलिस अब उनकी और बिचौलिए राम कुमार की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है.
मुजफ्फरपुर पुलिस के इस कड़े रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि जनता के साथ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों की जगह थाने में नहीं, बल्कि जेल में होगी.
रिपोर्ट: गोविंद कुमार
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