'जन गण मन हमारा राष्ट्रगान नहीं हो सकता!,' मुकेश खन्ना के बयान पर मचा भारी बवाल, जानिए क्यों 'शक्तिमान' को है एतराज
अभिनेता मुकेश खन्ना ने जन गण मन की जगह वंदे मातरम को राष्ट्रगान बनाने की मांग की है। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है।

New Delhi: TV के आइकॉनिक शो 'शक्तिमान' और 'महाभारत' में भीष्म पितामह का किरदार निभाकर घर-घर में मशहूर हुए दिग्गज अभिनेता मुकेश खन्ना एक बार फिर से बड़े विवाद में घिर गए हैं। इस बार उन्होंने देश के राष्ट्रगान 'जन गण मन' पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। मुकेश खन्ना का कहना है कि भारत का राष्ट्रगान 'जन गण मन' नहीं, बल्कि 'वंदे मातरम' होना चाहिए। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है और लोग उन्हें जमकर ट्रोल कर रहे हैं। हालांकि, मुकेश खन्ना को लोगों की ट्रोलिंग से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है और वे अब भी अपने बयान पर पूरी मजबूती से कायम हैं।
"अंग्रेजों के राजा का गुणगान है जन गण मन", मुकेश खन्ना का बड़ा दावा
न्यूज एजेंसी से बातचीत के दौरान मुकेश खन्ना ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि 'जन गण मन' को लेकर उन्होंने जो भी बातें कही हैं, वे पूरी तरह से सोच-समझकर कही गई हैं और यह गीत भारत का राष्ट्रगान नहीं हो सकता। मुकेश खन्ना के मुताबिक, इस गीत को अंग्रेजों के शासनकाल में लिखा गया था, जब देश पर जॉर्ज पंचम का राज था और भारत अंग्रेजों के अधीन था। उन्होंने कहा कि 'जन गण मन अधिनायक' शब्दों में 'अधिनायक' शब्द का सीधा मतलब उस समय के ब्रिटिश शासक से है और इसमें उन्हें भारत का भाग्य विधाता बताया गया है। उनका कहना है कि अगर इस गीत की पंक्तियों के शाब्दिक अर्थ को गहराई से देखा जाए, तो साफ पता चलता है कि यह गीत किसे संबोधित करके लिखा गया था।
ट्रोलिंग के बावजूद अपनी बात पर अड़े, कहा- 'वंदे मातरम' को मिले असली दर्जा
सोशल मीडिया पर अपने बयानों और तथ्यों को लेकर घिरने के बाद भी मुकेश खन्ना पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। उनका कहना है कि 'वंदे मातरम' को बेवजह एक विवादित मुद्दा बना दिया गया है, जबकि असल में इसे ही देश का राष्ट्रगान बनाया जाना चाहिए। मुकेश खन्ना के अनुसार, 'वंदे मातरम' में अपनी मातृभूमि के प्रति जो सम्मान, प्यार और समर्पण की भावना झलकती है, वह किसी और गीत में नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने अंग्रेजी शिक्षा पद्धति पर तंज कसते हुए कहा कि आजादी के इतने सालों बाद भी हम अंग्रेजों की सोच और उनकी शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा दे रहे हैं, जबकि भारत की अपनी एक बेहद समृद्ध और प्राचीन शिक्षा परंपरा रही है।
1870 में लिखा गया था वंदे मातरम, जानिए दोनों गीतों का इतिहास
मुकेश खन्ना के इस बयान के बाद अब दोनों गीतों के इतिहास को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। आपको बता दें कि 'वंदे मातरम' भारत का राष्ट्रीय गीत है, जिसे प्रसिद्ध बंगाली लेखक बंकिम चंद्र चटर्जी ने साल 1870 के आसपास एक कविता के रूप में लिखा था। बाद में साल 1950 में इसे भारत के राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया था। वहीं दूसरी तरफ, 'जन गण मन' को आज से करीब 115 साल पहले यानी 1911 में नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर ने लिखा था। अब मुकेश खन्ना के इस विवादित बयान के बाद देखना होगा कि बॉलीवुड और राजनीतिक गलियारों से इस पर आगे क्या प्रतिक्रियाएं आती हैं।
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